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टाटा पावर दो कंपनियों में बेचेगी अपना हिस्सा

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Last Updated- December 09, 2022 | 7:51 PM IST

निजी क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी बिजली बनाने वाली टाटा पावर कंपनी (टीपीसी) ने समूह की दूसरी दो कंपनियों टाटा टेलीसर्विसेज (टीटीएसएल) और टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र) (टीटीएमएल) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है।


सूत्रों का कहना है कि इन दोनों कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने के बाद कंपनी लगभग 2,000 करोड़ रुपये उगाह सकेगी, जिसका इस्तेमाल वह अपनी मौजूदा परियोजनाओं में करेगी।

कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी को बेचने पर विचार प्रवर्तक कंपनी टाटा संस ने तरजीही वॉरेंट को इक्विटी में बदलने की अपनी योजना को रोक दिया।

अगर यह योजना पूरी हो जाती तो कंपनी को इससे 1,900 करोड़ रुपये मिल सकते थे। अपनी मौजूदा परियोजनाओं में पैसा लगाने के लिए टाटा पावर को अगले चार साल में लगभग 24,000 करोड़ रुपये की जरूरत है।

कंपनी की योजना बतौर कर्ज 18,000 करोड़ रुपये उगाहने की है और बाकी की रकम यानी 6,000 करोड़ रुपये कंपनी इक्विटी के जरिये पूरी करेगी।

कैपिटलाइन के आंकड़ों के अनुसार गैर सूचिबध्द कंपनी टीटीएसएल के पास मार्च 2007 तक 610 करोड़ इक्विटी शेयर से अधिक हैं, जिनका अंकित मूल्य 10 रुपये प्रति शेयर था।

टीपीसी के पास मार्च 2008 तक टीटीएसएल में 71.14 करोड़ शेयर थे, जिसकी कंपनी की इक्विटी में लगभग 11.66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

डोकोमो करार के लिए किए गए मूल्यांकन के अनुसार टीपीसी को इस हिस्सॅदारी से लगभग 120 करोड़ डॉलर मिल सकते हैं। जापानी दूरसंचार ऑपरेटर कंपनी एनटीटी डोकोमो ने टीटीएसएल में 270 करोड़ डॉलर में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है।

टीपीसी की टीटीएमएल में लगभग 13.73 करोड़ शेयर हैं, जिससे कंपनी में टीपीसी की कुल इक्विटी में लगभग 7.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मौजूदा 22.40 रुपये शेयर कीमत के साथ टीपीसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच कर 300 करोड़ रुपये से अधिक उगाह सकती है।

ई-मेल के जरिये भेजे गए जवाब में टाटा पावर ने कहा है कि कंपनी अफवाहों या बाजार अटकलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहती। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है, ‘टाटा संस ने अपने विकल्प 10,38,900 वारंट इश्यू को इक्विटी शेयरों में नहीं बदला है।’

सूत्रों का कहना है, ‘हिस्सेदारी बेचने पर अंतिम मोहर कंपनी प्रवर्तकों से सलाह के बाद ही लगेगी। अगर टाटा संस खरीदने के लिए राजी हो जाती है तो पैसा उगाहना काफी आसान हो जाएगी। नहीं तो टीपीसी को मोल-भाव के बाद एक सही खरीदार की तलाश करनी होगी।’

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First Published - January 7, 2009 | 10:36 PM IST

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