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ईएसआरआई जीआईएस उपयोग के दूसरे चरण का उठा रही लाभ

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Last Updated- December 13, 2022 | 8:11 PM IST
Telecom

दूरसंचार क्षेत्र में ईएसआरआई के निजी क्षेत्र के ग्राहक 5जी सेवा नेटवर्क को तैनात करने के लिए अपने भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं। इन ग्राहकों में रिलायंस जियो और एयरटेल भी शामिल हैं। जीआईएस सॉफ्टवेयर इन्हें प्रत्येक टॉवर पर नजर रखने में मदद करता है। इसके साथ इस बात का भी पता लगाता है कि कितने उपयोगकर्ता नेटवर्क से जुड़े हुए हैं और उनमें से कितने के पास 5 जी मोबाइल फोन हैंडसेट है।

ईएसआरआई विश्व स्तर पर जीआईएस क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में से एक है। यह देश में सरकारी विभागों के उपयोगकर्ताओं की डिजिटल लोकेशन का विश्लेषण प्रदान करती है, जो ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड बनाने से लेकर ग्रामीण सड़कों पर नजर रखने और जल संसाधनों के प्रबंधन तक की असंख्य परियोजनाओं के लिए इसका उपयोग करती है। निजी कंपनियों में, यह बीमा कंपनियों, हवाईअड्डों, इस्पात और सीमेंट निर्माताओं, बिजली और रसद कंपनियों और यहां तक कि एसएमई तक के लिए विश्लेषण प्रदान करती है।

ईएसआरआई इंडिया के प्रबंध निदेशक अगेंद्र कुमार ने कहा कि भारतीय उद्यम में उनकी 51 फीसदी हिस्सेदारी है। कंपनी भारत में जीआईएस अपनाने के दूसरे चरण में है और बाजार बढ़ रहा है। आज ईएसआरआई के पास 5000 से अधिक संगठन हैं जो कंपनी के सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं और कुल 600,000 लोग भी इसका उपयोग कर रहे हैं।
कुमार ने कहा कि कंपनी तेजी से क्लाउड पर आगे बढ़ रही हैं, इसने उन्हें एमेजॉन और अन्य इसके जैसे डेटा केंद्रों के साथ गठजोड़ करने और प्रबंधित सेवाओं की पेशकश करने के लिए प्रेरित किया है।

कुमार ने कहा कि वर्तमान में इसका लगभग 30 फीसदी व्यवसाय निजी क्षेत्र से आता है बाकी सरकार से। पांच वर्ष पहले यह व्यवसाय 25 फीसदी के आसपास था। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि झुकाव निजी उद्यम के पक्ष में जाएगा। कंपनी के पास तीसरे पक्ष का डेटा नहीं है, लेकिन यह देश में जीआईएस सॉफ्टवेयर बाजार पर अपना आधिपत्य जमाए हुए है।
देश में भू-स्थानिक बाजार में उपग्रह सेवाओं में, ड्रोन, नेविगेशन सिस्टम, सर्वेक्षण कंपनियां, मानचित्र कंपनियां, हार्डवेयर कंपनियां, समाधान प्रदाता और निश्चित रूप से ईएसआरआई जैसे जीआईएस सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

एक शोध एजेंसी जियोस्पेशियल वर्ल्ड के मुताबिक, उद्योग का आकार इस कैलेंडर वर्ष में लगभग 27,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 तक 37,000 करोड़ हो जाएगा। यह बढ़ोतरी भारत के साथ-साथ निर्यात पर भी लागू होगी। एजेंसी ने कहा कि इसका कारण सरकार द्वारा देश की भू-स्थानिक नीति को उदार बनाना है।

नए बाजार खुल रहे हैं। कुमार ने कहा कि निजी बीमा कंपनियां पहले से ही उनकी ग्राहक हैं और वे दावों को बंद करने और नुकसान के कारण मुआवजा देने की सख्त सरकारी आवश्यकता को पूरा करने के लिए जीआईएस तकनीक का उपयोग कर रही हैं। ड्रोन का एक संयोजन (यदि फसल क्षति एक छोटे से क्षेत्र तक सीमित है) और उपग्रह डेटा को फसल क्षति की मात्रा की गणना करने और दावों को निपटाने के लिए उनकी जीआईएस तकनीक पर एकीकृत किया गया है।

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First Published - December 13, 2022 | 7:23 PM IST

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