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Flipkart मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT का आदेश रद्द किया, जांच के निर्देशों पर फिर से होगा विचार

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि मामले को एनसीएलएटी को भेजा जा सकता है, ताकि वह आयकर मूल्यांकन पर निर्भर रहे बिना मुद्दे की जांच कर सके

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भाविनी मिश्रा   
Last Updated- February 03, 2026 | 11:24 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के 2020 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के महानिदेशक को फ्लिपकार्ट द्वारा प्रतिस्पर्धा कानून के कथित उल्लंघनों की जांच करने का निर्देश दिया गया था।

मामले को वापस अपील न्यायाधिकरण को भेजते हुए अदालत ने एनसीएलएटी से मामले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा। अदालत का फैसला फ्लिपकार्ट के इस तर्क को ध्यान में रखते हुए आया है कि पिछला आदेश आयकर निर्धारण अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए निष्कर्षों पर आधारित था, जिसे बाद में आयकर अपील न्यायाधिकरण ने पलट दिया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून और तथ्य से संबं​धित सभी प्रश्नों की नए सिरे से पड़ताल की जा सकती है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली के पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार, जिसमें कोल इंडिया का निर्णय भी शामिल है, एनसीएलएटी को स्वतंत्र रूप से आकलन करना चाहिए कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है और क्या इसमें प्रतिस्पर्धा नियामक द्वारा आगे की जांच जरूरी है।

फ्लिपकार्ट इंटरनेट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने तर्क दिया कि कंपनी के खिलाफ न तो संबंधित बाजार में प्रभुत्व और न ही प्रभुत्व के दुरुपयोग का कोई मामला साबित हुआ है।

उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएलएटी के निष्कर्ष आयकर कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियों पर आधारित थे, जो आयकर अपीलन्यायाधिकरण द्वारा मूल्यांकन आदेश को रद्द करने के साथ निरर्थक हो चुके हैं।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि मामले को एनसीएलएटी को भेजा जा सकता है, ताकि वह आयकर मूल्यांकन पर निर्भर रहे बिना मुद्दे की जांच कर सके।

First Published : February 3, 2026 | 10:52 PM IST