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पंजाब में इस्पात इकाइयां हो रही हैं सेहतमंद

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Last Updated- December 10, 2022 | 8:17 PM IST

पंजाब में मंडी गोबिंदगढ़ की इस्पात इकाइयों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा वित्त वर्ष 2009-10 में बुनियादी ढांचा विकास के लिए दिए गए प्रोत्साहनों से लाभान्वित होने की उम्मीद नजर आ रही है।
मौजूदा आर्थिक मंदी की वजह से कई प्रस्तावित आवासीय और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में विलंब होने से मंडी गोबिंदगढ़ की ये इस्पात इकाइयां प्रभावित हुई हैं। भारत में जहाज तोड़ने के व्यवसाय में तेजी आने से कुछ हद तक मंदी कम हुई है, क्योंकि इस्पात अपशिष्ट आयातित अपशिष्ट की तुलना में काफी सस्ती कीमत पर उपलब्ध है।
भंवानी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के जे पी गोयल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि मौजूदा मंदी की वजह से वाहन निर्माताओं को आपूर्ति करने वाली इकाइयां अन्य कंपनियों की तुलना में ज्यादा प्रभावित हुई हैं, क्योंकि उनका भुगतान रुका पड़ा है।
उन्होंने कहा कि टीएमटी स्टील के निर्माण, अलॉय स्टील और कास्टिंग आदि के कारोबार में लगी इकाइयां मंदी के बावजूद अपना मुनाफा बचाने में काफी हद तक सक्षम रही हैं। गोयल टीएमटी स्टील, अलॉय स्टील और स्टील कास्टिंग का अमेरिका, नीदरलैंड्स और आस्ट्रेलिया के लिए निर्यात करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि कारोबार प्रभावित हुआ है, लेकिन देश में रोजगार सृजन के उद्देश्य से बुनियादी ढांचा विकास में प्रस्तावित खर्च से हमारी इकाइयों को प्रोत्साहन मिलेगा।’ गोयल सुनहरे भविष्य की संभावना देख रहे हैं और उन्होंने इस्पात में मूल्यवर्धित उत्पादों में विविधता लाने की योजना बनाई है। उन्होंने अगले वित्तीय वर्ष में निवेश करने की भी इच्छा जताई है।
उन्होंने कहा, ‘प्राथमिक उधारी बैंक दरों में कटौती और उचित कीमत पर कच्चे माल की उपलब्धता को देखते हुए भविष्य में हमें मजबूत आधार पैदा होने की उम्मीद है।’ इस्पात कीमतों में भारी गिरावट और इस्पात कबाड़ पर आयात शुल्क समाप्त किए जाने से मांग में गिरावट के बावजूद पिछली तिमाही में इकाइयों को कारोबार में बने रहने में मदद मिली है।
माधव उद्योग प्राइवेट लिमिटेड के सुधीर गोयल ने बताया कि उत्पादन घटा है और पिछली तिमाही और मौजूदा तिमाही में मार्जिन सिकुड़ा है। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अतिरिक्त नकदी से उन्हें छोटी इकाइयों को प्रोत्साहन मिला है।
सुधीर गोयल ने बताया, ‘अच्छी क्रेडिट रेटिंग के कारण बैंकों द्वारा नई उधारी के लिए हमसे संपर्क किया जा रहा है। हम ऑर्डर हाथ में आने पर कारोबार बढ़ाएंगे और नया निवेश करेंगे। हम लोक सभा चुनाव को लेकर भी काफी आशावादी बने हुए हैं। चुनाव के बाद हम कुछ बेहतर कर सकते हैं।’
मंडी गोबिंदगढ़ की इकाइयों में से कुछ तो 50 साल से भी अधिक पुरानी हैं और अब ये इकाइयां अपनी कार्य प्रणाली में तकनीकी रूप से बदलाव लाए जाने पर विचार कर रही हैं। इसकी प्रमुख वजह यह भी है कि इस कारोबार पर पुरानी पीढ़ी की पकड़ की जगह अब नई पीढ़ी के युवा पेशेवरों का दबदबा कायम है।

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First Published - March 16, 2009 | 11:20 PM IST

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