आईटी पर मंदी का असर भारत में अब तीखा होने लगा है। इसका पहला नमूना दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर उत्पाद कंपनी ऑरेकल ने दिखाया है।
बताया जा रहा है कि ऑरेकल ने भारत में काम करने वाले अपने 20,000 के आसपास कर्मचारियों के वेतन पर नए तरीके से कैंची चलानी शुरू कर दी है। कंपनी कर्मचारियों को उतने घंटों का ही वेतन दे रही है, जितने घंटे वास्तव में उन्होंने काम किया है।
इसकी वजह से विभिन्न कर्मचारियों के वेतन में 10 से 15 फीसदी तक की कटौती हो रही है। कंपनी के सूत्रों ने बताया कि यदि कोई कर्मचारी महीने में वास्तव में केवल 15 दिन काम कर रहा है यानी काम के घंटों के दौरान केवल आधा समय ही काम कर रहा है, तो उस आधे समय के लिए उसे नियत भुगतान किया जाएगा।
बाकी समय के लिए उसे मामूली सा भुगतान किया जाएगा। हालांकि कंपनी की प्रवक्ता ने इस बारे में भेजे गए ईमेल का सीधा जवाब नहीं दिया। उसने कहा, ‘ऑरेकल अटकलों या अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करती।’
यह भी कहा जा रहा है कि कंपनी फिलहाल काम नहीं कर रहे सभी कर्मचारियों को आंतरिक परियोजनाओं में लग जाने के लिए कहा है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें बाहर का रास्ता देखने के लिए कहा गया है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कंपनी ऐसे कर्मचारियों को दूसरी कंपनियों के लिए ठेके पर काम करने को कह रही है या खाली वक्त में उन्हें कुछ और करने के लिए कह रही है।
लेकिन ऑरेकल इंडिया ने इस फैसले के बारे में अपने कर्मचारियों को कुछ नहीं बताया है। विभिन्न केंद्रों पर टीम लीडर और परियोजनाआ प्रबंधकों को इस बारे में बता दिया गया है।
कर्मचारियों को भी वैश्विक मंदी के बारे में बार-बार बताया जा रहा है, जिसकी वजह से कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की छुट्टी कर रही हैं।
कंपनी के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, ‘हमें बताया जा रहा है कि तमाम कंपनियां अपने कर्मचारियों को निकाल रही है और ऑरेकल इस तरह के कदम नहीं उठाना चाहती। हमसे यह भी कहा जा रहा है कि जैसे ही हालात सुधरेंगे, हमारे पुराने दिन भी लौट आएंगे, जिसमें तमाम भत्ते मिलेंगे।’
कंपनी ने पिछले महीने अपने दूसरी तिमाही के नतीजों का ऐलान किया था। इसमें उसके राजस्व में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ था, लेकिन मुनाफा बरकरार रहा था।
ऑरेकल की शुद्ध आय में 0.5 फीसदी की कमी आई थी। इस दौरान कंपनी की बिक्री बढ़ी थी, लेकिन कमाई उम्मीद के मुकाबले काफी कम रही।