एससीआई, बीईएमएल की बिक्री में देरी के आसार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:03 PM IST

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) और बीईएमएल के निजीकरण के पहले केंद्र सरकार इन दो सार्वजनिक उपक्रमों के गैर प्रमुख संपत्तियों के डीमर्जर योजना में बदलाव कर रही है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के इन दो उपक्रमों (पीएसयू) के रणनीतिक विनिवेश में देरी हो सकती है।  
इन बदलावों में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के मामले में अलग की गई इकाई को कुछ अतिरिक्त नकदी का हस्तांतरण प्रक्रिया में है। बोर्ड को इसकी मंजूरी देने को कहा गया है, जिससे कि निजीकरण की प्रक्रिया चल सके। इन बदलावों को लागू किए जाने और उसके बाद उसे कंपनी मामलों के मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद केंद्र इसके लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित करेगा।
अधिकारी ने कहा, ‘इस प्रक्रिया में वक्त लगेगा और एससीआई के लिए वित्तीय बोली आमंत्रित करने में 3-4 महीने में तैयार होंगे।’ अधिकारी ने कहा कि इसी तरह की समयसीमा की उम्मीद बीईएमएल के निजीकरण के मामले में भी की जा रही है, क्योंकि उसकी भी गैर प्रमुख संपत्ति को अलग करने की प्रक्रिया चल रही है।
एससीआई की गैर प्रमुख संपत्तियों को अलग करने के लिए 10 नवंबर, 2021 को कंपनी अधिनियम के तहत शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लैंड ऐंड असेट्स लिमिटेड (एससीआईए लएएल) का गठन किया गया था। यह इकाई एससीआई के मुंबई स्थित मुख्यालय के शिपिंग हाउस में पंजीकृत है। इसका गठन एससीआई की गैर प्रमुख संपत्तियों को रखने व उन्हें निपटाने के लिए किया गया है। अलग की गई इकाई एससीआई की ही तरह या उसके प्रतिरूप शेयरहोल्डिंग के रूप में होगी।  एससीआईएलएएल की अधिकृत पूंजी 5 लाख रुपये है और पेड-अप शेयर पूंजी 1 लाख रुपये है।
अधिकारी ने कहा कि एससीआई द्वारा घोषित गैर प्रमुख संपत्तियों के डीमर्जर की योजना में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिसमें अतिरिक्त नकदी को मंजूरी दिया जाना शामिल है। अधिकारी ने कहा कि एससीआई के बोर्ड की बैठक शुक्रवार को हुई थी और माना जा रहा है कि इसके लिए बोर्ड ने मंजूरी दे दी है।
एससीआई की गैर प्रमुख संपत्तियों के डीमर्जर की योजना के मुताबिक अलग की गई इकाई को अतिरिक्त नकदी हस्तांतरण की जरूरत थी, जिससे कि रखरखाव और इस तरह की संपत्तियों को रोके रखा जा सके। योजना के मुताबिक गैर प्रमुख संपत्तियों के रखरखाव के लिए 450 करोड़ रुपये रखा गया है। यह राशि बढ़ाई जा सकती है, जो चल रले वेसल अधिग्रहण और अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरतों पर निर्भर होगा। डीमर्जर प्रक्रिया के हिस्से के रूप में मैरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एमटीआई) और एससीआईए लएएल को शिपिंग हाउस हस्तांतरण का काम निजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाएगा। दोनों संपत्तियों का हस्तांतरण महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर है। एससीआई द्वारा एमटीआई का बुक वल्यू करीब 2,390 करोड़ रुपये और शिपिंग हाउस बिल्डिंग का बुक वैल्यू 26.88 करोड़ रुपये रिकॉर्ड किया गया है।
केंद्र एससीआई में अपनी पूरी 63.75 प्रतिशत  हिस्सेदारी बेचने की फिराक में है। इसके साथ ही प्रबंधन का नियंत्रण भी हस्तांतरित किया जाएगा। मार्च 2021 में केंद्र ने कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई बोलियां हासिल की थी, लेकिन कोविड-19 महामारी और भूराजनीतिक तनावों की वजह से प्रक्रिया में देरी हो रही है।
बीईएमएल के मामले में गैर प्रमुख संपत्तियों की इकाई बीईएमएल लैंड असेट्स लिमिटेड का गठन किया गया, जिसकी अधिकृत पूंजी 10 लाख रुपये और पेड अप शेयर पूंजी 1 लाख रुपये है। सरकार बीईएमएल में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है, जिसकी कंपनी में कुल हिस्सेदारी 54.03 प्रतिशत है।

First Published : May 11, 2022 | 11:37 PM IST