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सत्यम पर कसा शिकंजा

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Last Updated- December 09, 2022 | 8:53 PM IST

सत्यम में फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद हरकत में आई सरकार और बाजार नियामक सेबी कंपनी के चेयरमैन रामलिंग राजू और कंपनी के प्रबंधकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहे हैं।


कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता ने कहा है कि इस मामले की गहनता से जांच की जाएगी और दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि सेबी को सत्यम कंप्यूटर्स और उसकी सहयोगी आठ कंपनियों के खातों की जांच करने को कहा गया है।

इन कंपनियों की जांच कंपनी अधिनियम की धारा 209 (ए) के प्रावधानों के तहत की जाएगी। जांच के दायरें में शामिल कंपनियों में माटास प्रॉपर्टीज, मायटास इन्फ्रास्ट्रक्चर, सत्यम बीपीओ, निपुण सर्विसेज, नॉलेज डयनैमिक्स, निटोर ग्लोबल साल्यूशंस, सीए सत्यम एएसपी और सत्यम वेंचर इंजीनियरिंग सर्विसेज शामिल हैं।

गुप्ता ने कहा कि इन कंपनियों के खातों की जांच कर अगले तीन दिनों में रिपोर्ट आ जाने की संभावना है। उसके बाद ही कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी के बोर्ड को भंग कर नए निदेशकों की नियुक्ति भी कर सकती है। उधर, रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से कहा है कि वह सत्यम और उसकी सहायक कंपनियों में अपने निवेश का खुलासा करे।

गुप्ता ने कहा कि हम वित्त मंत्रालय, सेबी और आईसीएआई के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और हर संभव कदम उठाने के लिए सरकार तैयार है। यही नहीं, सरकार कॉरपोरेट गवनर्स कानूनों की भी समीक्षा कर सकती है, ताकि भविष्य में सत्यम की तरह फर्जीवाड़े से बचा जा सके।

उन्होंने बताया कि कानून के विभिन्न प्रावधानों को सख्त किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस विधेयक पर अभी संसद की अनुमति मिलनी बाकी है। सरकार 52 साल पुराने कंपनी अधिनियम, 1956 की जगह पर नया कानून लाना चाहती है।

रिजर्व बैंक सत्यम के खातों की ऑडिट करने वाली कंपनी प्राइस वॉटरहाउस के खिलाफ भी कार्रवाई का निर्देश दे सकता है। इस बीच, आईसीएआई ने सेबी, ऑडिट फर्म, सत्यम कंप्यूटर को पत्र लिखकर अगले 21 दिनों में कंपनी के खातों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है।

आईसीएआई के उपाध्यक्ष उत्तम  प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि जरूरी दस्तावेजों के अभाव में संस्था को फर्जीवाड़ा करने वाले ऑडिटर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई मुश्किलें आ सकती हैं।


एक और झटका

कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी वल्दामणि श्रीनिवास ने भी गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मैनमपति की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही अपना इस्तीफा भेज दिया, जो शीर्ष नेतृत्व को इकट्ठा रखने की कोशिश के लिए झटका है।

सेबी ने शुरू कर दी पड़ताल

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के जांच दल ने हैदराबाद स्थित सत्यम मुख्यालय पहुंच कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

सत्यम के अध्यक्ष बी रामलिंग राजू द्वारा वर्षों से कंपनी खातों में की जा रही हेरा-फेरी का खुलासा करने के बाद सेबी ने विशेष दल का गठन किया है।

सेबी के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि नियामक के दक्षिणी क्षेत्र के महाप्रबंधक ए. सुनील कुमार की अध्यक्षता वाली समिति हैदराबाद पहुंच गई है और वह जांच शुरू कर चुकी है।

सत्यम की जगह सन

सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज को 12 जनवरी से सेंसेक्स से बाहर कर दिया जाएगा। खास बात यह कि इसकी जगह सन फार्मा को मिलेगी।

बता दें, कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को ही निफ्टी सूचकांक से सत्यम को हटाने की घोषणा कर दी थी। हालांकि यह 12 जनवरी से ही लागू किया जाएगा।

सत्यम में हुई हेरा-फेरी के मामले की सरकार द्वारा गहनता से जांच की जाएगी और दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

प्रेमचंद गुप्ता
कंपनी मामलों  के मंत्री


त्यम पर कार्रवाई करना केंद्र पर निर्भर करता है कि वह इस बारे में फैसला करे। हमने प्रधानमंत्री को पहले पत्र लिख दिया है।

राजशेखर रेड्डी
आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री

अमेरिका में भी मामला दायर

राजू और सत्यम प्रबंधकों के खिलाफ अमेरिका में भी केस दायर हो गया है। सत्यम की धोखाधड़ी के कारण अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (एडीआर) के शेयरधारकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

यही वजह है कि अमेरिका स्थित दो लॉ कंपनियों- आईजार्ड नोबल एलएलपी और वायनाली एंड वायनाली एलएलपी ने सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के खिलाफ क्लास एक्शन केस दायर किया है।

न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को कहा था कि एक्सचेंज सत्यम से जुड़े सभी मामलों पर नजर रख रहा है। साथ ही अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है।

सत्यम में निवेश बताएं बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को सत्यम कंप्यूटर और उससे संबंधित कंपनियों को अगर कोई लोन दिया गया है या फिर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कंपनी के शेयर हों, तो उसका विवरण उपलब्ध कराने को कहा है।

निर्देश में इस बात का भी उल्लेख है कि भारतीय बैंकों के अंतरराष्ट्रीय शाखाओं का भी अगर कोई एक्सपोजर सत्यम में हो, तो उसका जिक्र किया जाए।

अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रिजर्व बैंक सत्यम को मिलने वाले अल्प अवधि के कर्ज पर रोक लगा सकता है, क्योंकि कंपनी के शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट का रुख है।

इसके साथ ही जिन संस्थागत होल्डिंग्स के पास कंपनी के डायरेक्ट शेयर हों, उन्हें दिए गए दीर्घावधि लोन की रिवकरी की जाए। इस संबंध में जल्द ही बैंकों की बैठक आयोजित की जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक का सत्यम कंप्यूटर में करीब 200 करोड़ रुपया लगा हुआ है, लेकिन बैंक की ओर से फिलहाल इसके बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया है।

एलआईसी भी चिंतित

संकटग्रस्त कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज में 4.34 फीसदी की हिस्सेदारी वाली सरकारी बीमा कंपनी जीवन बीमा निगम ने कहा कि वह स्थिति का आकलन कर रही है।

उसके बाद ही कंपनी कोई फैसला लेगी। एलआईसी के प्रबंध निदेशक थॉमस मैथ्यू ने कहा कि सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज में कंपनी की हिस्सेदारी 4.34 फीसदी है।

कंपनी इस बारे में चिंतित हैं और स्थितियां जैसा स्वरूप लेती हैं, उसके आधार पर फैसला कियाय जाएगा। निवेश के प्रभारी मैथ्यू ने कहा कि एलआईसी दीर्घकालिक निवेशक है और कंपनी किसी अल्पकालिक निवेश में भरोसा नहीं करती।

निवेशक करेंगे मुकदमा

गैर-सरकारी संस्था नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्माल इन्वेस्टर (नासी) ने कहा कि वह सत्यम के खिलाफ शेयरधारकों और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में शिकायत दर्ज करेगी।

नासी के अध्यक्ष प्रदीप भवनानी ने कहा कि यह देश पर वित्तीय हमला है। शेयरधारकों और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए आर्थिक अपराध विभाग (ईओडी) में सत्यम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि कई सदस्यो ने करीब चार महीने पहले यह शेयर 540 रुपये पर लिया था, उन्हें बुधवार भारी नुकसान उठाना पड़ा जब शेयर 39 रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

भवनानी ने कहा कि ईओडी को मामले की जांच करने और प्राईसवाटरहाउसकूपर्स समेत सभी ऑडिटर को सजा दिलाने के लिए लिखा जाएगा।

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First Published - January 9, 2009 | 12:12 AM IST

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