भले ही घरेलू दवा बाजार धीमी गति से बढ़ रहा हो, लेकिन दवा कंपनियों के कोविड दवा पोर्टफोलियो में अच्छी तेजी देखी गई है। उदाहरण के लिए, जापान की ओरल एंटीवायरस दवा फैविपिराविर (शुरू में भारत में फैबिफ्लू ब्रांड नाम से ग्लेनमार्क द्वारा पेश की गई) भी इसमें शामिल है। एक महीने के अंदर करीब एक दर्जन ब्रांड बाजार में आए हैं। बाजार शोध फर्म एआईओसीडी अवॉक्स के आंकड़ों से पता चलता है कि फैबिफ्लू की बिक्री जुलाई में 62 प्रतिशत तक बढ़ी। इसे जून में पेश किया गया था। इस दवा का इस्तेमाल चिकित्सकों द्वारा कोविड के मामूली लक्षण वाले मरीजों पर इस्तेमाल किया जा रहा है, भले ही वे घर पर आइसोलेशन से गुजर रहे हों। चूंकि यह मुंह से ली जाने वाली दवा है, इसलिए इसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है।
हैदराबाद की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) फैविपिराविर का नया ब्रांड एविजन पेश करने की तैयारी में है और इसके लिए उसने जापान की फुजिफिल्म तोयामा केमिकल कंपनी और ग्लोबल रेस्पोंस ऐड (जीआरए) के साथ भागीदारी की है। इस दवा को इसी महीने पेश किए जाने की संभावना है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि कम दवा इस्तेमाल और अधिग्रहीत वॉकहार्ट पोर्टफोलियो में धीमी वृद्घि की वजह से पहली तिमाही के दौरान भारत में उसका राजस्व प्रभावित हुआ। फिर भी, वह अपने कोविड19 पोर्टफोलियो को लेकर उत्साहित है।
महामारी के दौरान डीआरएल न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद और हैंड सैनिटाइजर्स पहले ही पेश कर चुकी है। पहली तिमाही में डीआरएल के भारतीय व्यवसाय में सालाना
आधार पर 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
डीआरएल के मुख्य कार्याधिकारी इरेज इजरायली का मानना है कि ये उत्पाद सिर्फ महामारी ही नहीं बल्कि दीर्घावधि को ध्यान में रखकर पेश किए जा रहे हैं। हालांकि इजरायली का यह भी मानना है कि कोविड-19 स्वास्थ्य संकट एक अन्य वर्ष तक बना रह सकता है जिसका मतलब है कि कोविड से संबंधित उत्पादों का प्रदर्शन मजबूत बना रहेगा।
अहमदाबाद की कैडिला हेल्थकेयर भी कोविड संबंधित उत्पादों के लिए आगे बनी हुई है। उसने एलिसा टेस्टिंग किट से लेकर सैनिटाइजर तक और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं पर ध्यान दिया है। कैडिला ने इंजेक्शन के जरिये इस्तेमाल होने वाली दवा रेमडेसिविर का सस्ता ब्रांड पेश किया है। इसकी कीमत 2800 रुपये प्रति खुराक है और वह हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) की भी बिक्री करती है, जिसका इस्तेमाल भारत में सार्स-कोव2 वायरस से लडऩे के लिए प्रोफीलैक्टिक के तौर पर किया गया है। जाइडस और इप्का ने भी एचसीक्यू का निर्माण किया और अप्रैल के आसपास सरकार को 10 करोड़ टैबलेट की आपूर्ति की।
सिप्ला जैसी दवा कंपनियों का कहना है कि कोविड से संबंधित दवाएं ऊंचे मार्जिन पर नहीं बेची जा रही हैं। सिप्ला के वैश्विक सीएफओ केदार उपाध्ये ने कहा, ‘हम इन दवाओं से कमाई नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह यहां जन स्वास्थ्य है। हमें इनकी बिक्री से जो भी थोड़ी बहुत रकम मिली है हमने इसे पीपीई किट आदि के जरिये दान में दिया है।’