भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नवनियुक्त अध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन मानते हैं कि अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरनी शुरू होने के बावजूद देश अभी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। चेन्नई स्थित टीवीएस मोटर के प्रबंध निदेशक वेणु श्रीनिवासन से सपना डोगरा सिंह ने बात की। पेश है बातचीत के संक्षिप्त अंश :
नए वित्त वर्ष में आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
रोजगार पैदा कराना और गरीबी दूर करना हमारी पहली प्राथमिकता होगी। दुनिया की अर्थव्यवस्था अब स्थिर हो रही है और जल्द ही यहां भी सकारात्मक दिखने लगेंगे।
हां, हो सकता है यह सुधार धीमी गति से हो। दूसरे स्थान पर संरक्षणवाद का मसला आता है। हम पहले ही इस मसले का प्रधानमंत्री के समक्ष उठा चुके हैं। विकसित देश जिस तरह संरक्षणवाद को बढ़ा रहे हैं, वह चिंताजनक है। हमारी अन्य प्राथमिकताओं में बुनियादी ढांचा निर्माण और कॉरपोरेट गवर्नेंस है।
आप अभी संरक्षणवाद की आलोचना कर रहे थे। साथ ही भारत को सुरक्षात्मक कदम उठाने की वकालत भी कर रहे हैं। ये दोनों क्या विरोधाभासी बातें नहीं हैं?
नहीं, ये दोनों दो मुद्दे हैं। एंटी-डंपिंग और सेफगार्ड डयूटी घरेलू बाजार को नुकसान से बचाने के लिए अपनाए जाने जरूरी हैं।
आधारभूत ढांचा क्षेत्र की चुनौतियों से किस तरह निपटेंगे?
देश का बुनियादी ढांचा बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है। इस क्षेत्र में भारी निवेश की जरूरत है। जिंसों की कीमतें काफी नीचे जाने के बाद इस समय बुनियादी ढांचा में निवेश के लिए काफी मुफीद है। इससे अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद है। इतना ही नहीं सरकार को चाहिए कि वह सरकारी परियोजनाओं पर निवेश में भारी बढ़ोतरी करे।
निजी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने के लिए अनुकूल माहौल बनाए जाने की भी जरूरत है। डिलीवरी प्रक्रिया में सुधार किए जाने की सख्त जरूरत है। ठेका निकालने, बोली लगाने, जमीन आवंटन और विवादों का निपटारा जैसे कई मुद्दे हैं; जिसके चलते प्रक्रिया पूरी होने में विलंब होती है।
क्या आप और वित्तीय सुधार की उम्मीद कर रहे हैं?
हां, हम उम्मीद करते हैं कि रिजर्व बैंक रेपा और रिवर्स रेपो की दर में और 0.5 फीसदी की कटौती करेगा। हालांकि यह तभी हो सकता है, जब बॉन्ड अर्थव्यवस्था की सेहत में सुधार दिखाना शुरू करे। फिलहाल, सरकारी कोशिशों के चलते बॉन्ड से मिलने वाले लाभ में इजाफा हुआ है।
फिलहाल 10 साल वाले बॉन्ड के लाभ काफी ज्यादा हैं। जरूरत है कि वित्तीय घाटा दुरुस्त किया जाए और वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम में परिवर्तन किया जाए। सीआईआई का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वित्तीय घाटा दुरुस्त करना सबसे बढ़िया उपाय है।
कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सीआईआई की क्या योजना है?
सीआईआई चाहता है कि उसकी सदस्य कंपनियां इस मसले पर संवेदनशील हों। हमारे पास इस मामले में पर्याप्त कानून हैं। असल में सहमत होना प्रमुख मसला है। सीआईआई के लिए यह बड़ा अहम मसला है। जो कंपनियां कॉरपोरेट गवर्नेंस के मसले पर दुरुस्त हैं, उनका बाजार पूंजीकरण आधार काफी बड़ा है।