देश में कुछ बड़े फूड और ग्रॉसरी स्टोर मौजूदा मंदी का शिकार हो सकते हैं। इनमें से कुछ स्टोर बंद हो सकते हैं या विलय की राह पर चलने को बाध्य हो सकते हैं।
बोस्टन कंसल्टिंग गु्रप के पार्टनर एवं निदेशक आनंद रघुरमण ने कहा कि इन स्टोरों को मंदी के दबाव को झेल पाना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि इनके व्यवसाय की श्रेणी में मार्जिन सभी रिटेल फॉर्मेट की तुलना में काफी कम है।
सुभिक्षा और ऐसे अन्य फूड और ग्रॉसरी रिटेल स्टोरों का मार्जिन परिधान स्टोरों के 10-15 फीसदी मार्जिन की तुलना में 2-3 फीसदी ही है।
अपने स्टोरों के जरिये निजी लेबलों की बिक्री करने वाले रिटेलर कुछ उत्पादों पर 30 फीसदी से भी अधिक का मार्जिन हासिल करते हैं। आर सुब्रमण्यम प्रवर्तित फूड एवं ग्रॉसरी फॉर्मेट चेन सुभिक्षा फल एवं सब्जियों के कारोबार से पहले ही बाहर हो चुका है।
इस रिटेलर ने नकदी की कमी और मौजूदा मंदी की वजह से कंज्यूमर डयूरेबल कारोबार में दस्तक देने की अपनी योजनाओं को टाल दिया है।