India flexi staffing industry: नई श्रम संहिता का फ्लैक्सी स्टाफिंग उद्योग पर थोड़ा असर देखने को मिल रहा है। इस संहिता के कारण वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में इस उद्योग में रोजगार वृद्धि दर सुस्त पड़ गई। हालांकि चालू वित्त वर्ष की चौथी और अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रोजगार के अवसरों में तेजी की संभावना है। सालाना आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में रोजगार में वृद्धि दर्ज की गई। उक्त तिमाही इस उद्योग में कुल औपचारिक कर्मचारियों की संख्या 19 लाख पार कर गई है।
तीसरी तिमाही में कितने बढ़े रोजगार?
इंडियन फ्लैक्सी स्टाफिंग फेडरेशन (ISF) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में तिमाही आधार पर रोजगार में 0.5% की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जो पहले की दो अंकों वाली वृद्धि की तुलना में औपचारिक रोजगार विस्तार की गति धीमी होने का संकेत देती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कंपनियां अब अधिक सावधानी के साथ भर्ती कर रही हैं। हालांकि लचीला कार्यबल मॉडल भारत के संगठित रोजगार ढांचे में अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं तीसरी तिमाही में रोजगार में सालाना आधार पर 4.4% की वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि से औपचारिक कर्मचारियों की संख्या 19.1 लाख तक पहुंच गई है। पिछले चार तिमाहियों में इस क्षेत्र ने 69,000 नए औपचारिक रोजगार जोड़े हैं, जिनमें ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, FMCG और हेल्थकेयर क्षेत्रों में त्योहारी मांग का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आईएसएफ के अध्यक्ष लोहित भाटिया ने कहा कि, ‘फ्लेक्सी-स्टाफिंग में 4.4% की वृद्धि एक मजबूत मॉडल को दर्शाती है, जो भारत में रोजगार के औपचारिककरण का प्रमुख माध्यम बना हुआ है, विशेष रूप से उन 59% नए श्रमिकों के लिए जिनकी आयु 18 से 25 वर्ष है और जो औपचारिक रोजगार में प्रवेश कर रहे हैं। नए श्रम संहिताओं के लागू होने से तीसरी तिमाही में कुछ रणनीतिक विराम आया क्योंकि कंपनियां लागत संरचना को समायोजित कर रही थीं। फिर भी अनौपचारिक से औपचारिक रोजगार की खाई को पाटने में इस क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में रोजगार में वृद्धि फिर से तेज होगी।’
आईटी स्टाफिंग में 16.1% की वृद्धि
तीसरी तिमाही में आईटी स्टाफिंग क्षेत्र में 16.1% की उल्लेखनीय वार्षिक वृद्धि हुई, जो मुख्य रूप से ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटर (GCC) और उच्च मांग वाले टेक्नोलॉजी कौशलों के कारण हुई। GCC ने अकेले आईटी रोजगार की वृद्धि का 73% योगदान दिया। इस वृद्धि के कारण आईटी क्षेत्र में विशेषज्ञता की मांग बढ़ी है, जिसमें एआई, क्लाउड और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निरंतर विकास देखा जा रहा है। आईएसएफ के उपाध्यक्ष मनमीत सिंह ने कहा कि वैश्विक आर्थिक बदलाव और अमेरिकी नियामकीय परिवर्तनों से कुछ सतर्कता जरूर आई है, लेकिन एआई, क्लाउड और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे आईटी स्टाफिंग युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली वेतनभोगी नौकरियों का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
2025 में स्टाफिंग उद्योग से जुड़े 72 लाख श्रमिक
आईएसएफ की रिपोर्ट में पिछले एक दशक (2013–2025) के आंकड़े भी सामने आए हैं। जिनके अनुसार औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट स्टाफिंग उद्योग अब 72.3 लाख श्रमिकों को EPFO से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस उद्योग द्वारा ₹1,60,506 करोड़ का वार्षिक वेतन भुगतान किया गया, जबकि सामाजिक सुरक्षा और GST योगदान ₹57,509 करोड़ रहा। कुल मिलाकर स्टाफिंग उद्योग भारत में रोजगार सृजन, औपचारिककरण और कौशल विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
First Published - March 10, 2026 | 3:25 PM IST
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