Asia Pacific Investment-Real Estate: एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में रियल एस्टेट निवेश में भारत सबसे तेज वृद्धि दर्ज करने वाले प्रमुख बाजारों में शामिल है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म कॉलियर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत में रियल एस्टेट निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश की वृद्धि दर एशिया प्रशांत क्षेत्र के अन्य प्रमुख बाजारों की तुलना में तीन अधिक रही। साथ भारत की वृद्धि दर सिंगापुर के बाद सबसे अधिक है।
कॉलियर्स की Asia Pacific Investment Insights – March 2026 रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत में रियल एस्टेट में निवेश 29% बढ़कर रिकॉर्ड 8.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि इस रिपोर्ट के अनुसार एशिया-प्रशांत के नौ प्रमुख बाजारों में 2025 के दौरान कुल रियल एस्टेट निवेश 8% बढ़कर 162 अरब डॉलर रहा। जाहिर है भारत में निवेश एशिया प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार साल की दूसरी छमाही में सौदों में तेजी के कारण निवेश गतिविधि में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की दूसरी छमाही में 87.3 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो सालाना आधार पर 11% और पहली छमाही के मुकाबले 17% अधिक है। इससे क्षेत्र में निवेशकों के भरोसे और लेन-देन की गति में सुधार का संकेत मिलता है।
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निवेश मात्रा के लिहाज से दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर शीर्ष बाजार रहे। हालांकि सालाना वृद्धि के मामले में सिंगापुर (35%) और भारत (29%) सबसे आगे रहे, जो इन बाजारों में बेहतर बुनियादी स्थिति और निवेश अवसरों के विस्तार को दर्शाता है।
कॉलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक बादल याग्निक ने कहा कि एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में भारत एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। वर्ष 2025 में नौ प्रमुख एपीएसी बाजारों के बीच रियल एस्टेट निवेश वृद्धि के मामले में भारत ने सबसे मजबूत प्रदर्शन में से एक दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि जहां एपीएसी के अधिकांश बाजारों में निवेश गतिविधियों को घरेलू पूंजी आगे बढ़ा रही है, वहीं भारत में सीमा-पार निवेश अपेक्षाकृत अधिक मजबूत रहा है। वर्ष के दौरान आए 8.5 अरब डॉलर के निवेश में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 43% रही। मजबूत आर्थिक विकास संभावनाओं और उच्च गुणवत्ता वाली परिसंपत्तियों की निरंतर मांग के चलते 2026 तक भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेश मजबूत बने रहने की उम्मीद है। हालांकि वैश्विक चुनौतियों और जारी व्यापार वार्ताओं के प्रभाव पर नजर बनाए रखना भी जरूरी होगा।
कॉलियर्स की इस रिपोर्ट के अनुसार सेक्टर के हिसाब से ऑफिस परिसंपत्तियां निवेशकों की पहली पसंद बनी रहीं। 2025 में ऑफिस सेगमेंट में निवेश 21% बढ़कर 58.5 अरब डॉलर हो गया, जो कुल निवेश का 36% है। इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 30.1 अरब डॉलर का निवेश हुआ और यह दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट रहा। वहीं खुदरा (रिटेल) संपत्तियों में निवेश 15% बढ़कर 29.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, वैकल्पिक परिसंपत्तियां (alternatives) सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट रहा, जिसमें निवेश 191% बढ़ा।
कॉलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर (रिसर्च) विमल नादर ने कहा कि भारत में ऑफिस सेगमेंट में लगभग 4.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल संस्थागत निवेश का आधे से अधिक हिस्सा है।
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कोलियर्स की इस रिपोर्ट के मुताबिक अनुमान लगाया गया है कि 2026 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवेश की गति और मजबूत होगी। इसके पीछे ब्याज दरों और महंगाई का स्थिर होना, वित्तपोषण की परिस्थितियों में बेहतर स्पष्टता और सीमा-पार पूंजी प्रवाह में धीरे-धीरे सुधार जैसे कारक प्रमुख रहेंगे। घरेलू पूंजी के लेनदेन गतिविधियों का प्रमुख चालक बने रहने की उम्मीद है, जबकि जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ने और कीमतों में अधिक निश्चितता आने के साथ विदेशी निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ सकती है। ऑफिस जैसे मुख्य क्षेत्रों में निवेश की गहराई बनी रहने की संभावना है, वहीं वैकल्पिक परिसंपत्तियां और चुनिंदा रिटेल सेगमेंट भी आय की स्थिरता और दीर्घकालिक वृद्धि की तलाश में निवेशकों को आकर्षित करेंगे।