facebookmetapixel
Advertisement
बॉन्ड यील्ड में गिरावट से बैंकों को होगा फायदा, Q1 में ट्रेजरी मुनाफा बढ़ने की उम्मीदFiscal Deficit: अप्रैल-मई में सरकार का राजकोषीय घाटा 12 गुना बढ़ा, RBI डिविडेंड के बावजूद बढ़ा दबावRBI FSR: मार्च में बैंकों का एनपीए घटकर 0.4% पर, कृषि क्षेत्र में सबसे ज्यादा फंसे कर्ज का दबावअर्थव्यवस्था मजबूत, पर मॉनसून और पश्चिम एशिया संकट से अब भी जोखिमडिबेंचर धारकों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित, नियमों की होगी समीक्षाSEBI AIF Rules: निवेशकों के अधिकार बढ़ाने की तैयारी, संबंधित पक्षों के सौदों पर 75% मंजूरी का प्रस्तावCrude Oil Outlook: दूसरी छमाही में कच्चा तेल औसतन 72 डॉलर रहने के आसार: बोफाकोविड के बाद सेंसेक्स की सबसे खराब पहली छमाही, मिड-स्मॉलकैप बने निवेशकों का सहारादुबई रियल एस्टेट में सुस्ती के बीच FY27 में डैन्यूब की नजर 4 अरब डॉलर की परियोजनाओं परARAI ने बदला फैसला, ऑटो पीएलआई स्कीम में अब पूरे साल लागू होगी एक ही विनिमय दर

ऑडिट के आधार पर ही होती है रेटिंग

Advertisement
Last Updated- December 09, 2022 | 9:06 PM IST

रामलिंग  राजू के सनसनीखेज खुलासे से यह साफ जाहिर होता है कि राजू वित्तीय अनियमितताओं की खिचड़ी सालों से पकाते रहे और उनके निदेशक इससे बेफिक्र रहे।


यहां तक कि पूर्णकालिक निदेशक ने भी अनियमितता से जुडा कोई भी मुद्दा नहीं उठाया।

आईसीआरए के प्रबंध निदेशक नरेश टक्कर ने कहा, ‘रेटिंग एजेंसियां ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर हीं रेटिंग तैयार करती है। अगर ऑडिट रिपोर्ट ही विश्वसनीय नहीं है, तो जाहिर सी बात है कि रेटिंग की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।’ 

साथ ही रेटिंग एजेंसियों के पास ऐसे अधिकार और संसाधन नही होते कि वे किसी कंपनी की फिर से ऑडिट करा सकें। जब तक सत्यम की अनियमितताओं का खुलासा नहीं हुआ था, तब तक कंपनी उन सारी शर्तों को पूरा करती थी, जो किसी कंपनी को सर्वोच्च रेटिंग देने के लिए जरूरी होता है।

मुंबई की एक रेटिंग एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कागज पर सत्यम अधिकतम रेटिंग प्राप्त करने की सारी योग्यता रखता था। इस मामले में कंपनी के खिलाफ जो एकमात्र बात जाती है, वह है इनके प्रोमोटर्स की राजशाही।’

एडेल्विस के विशेषज्ञ विजू जॉर्ज कहते हैं कि कॉरपोरेट गवनर्स का संचालन कड़े तौर तरीकों पर निर्भर नहीं करता है, इसे परिमाणों में नहीं रखा जा सकता है। उनके मुताबिक काफी लंबे समय में यह महसूस किया जा सकता है कि कोई कंपनी प्रबंधन के हर स्तर पर अच्छा या गलत प्रदर्शन कर रही है।

आईसीआरए और क्रिसिल जैसी प्रमुख रेटिंग एजेंसियां मानती है कि बोर्ड की संरचना, मालिकाना हक संरचना, पारदर्शिता और घोषणा, शेयरधारकों से संबंध, वित्तीय अनुशासन आदि ऐसे कारक हैं, जिसके आधार पर बेहतर कॉरपोरेट गवनर्स का आकलन किया जा सकता है।

बोर्ड में स्वतंत्र और कार्यकारी निदेशकों के बीच एक बेहतर संतुलन होना चाहिए। सत्यम इन सारे मानकों पर खरा उतरता था।

Advertisement
First Published - January 9, 2009 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement