विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के कानूनों में फंसकर इंजीनियरिंग क्षेत्र की दो दिग्गज कंपनियां आपस में भिड़ गई हैं। ये दोनों कंपनियां हैं, सैंडविक एशिया लिमिटेड और गुजरात की एमको एल्कॉन।
दिलचस्प है कि फिलहाल दोनों कंपनियां मिलकर एक संयुक्त उपक्रम चला रही हैं। मामला भी कुछ इसी से जुड़ा है। दरअसल, मूल रूप से स्वीडन की कंपनी सैंडविक जिस क्षेत्र में एमको के साथ मिकलर संयुक्त उपक्रम चला रही है उसी क्षेत्र की एक कंपनी में यह बड़ी हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है।
लेकिन एमको इसके खिलाफ खड़ी हो गई?है।?कानूनी तौर पर एमको का पक्ष मजबूत भी लगता है क्योंकि मौजूदा नियमों के तहत सैंडविक को सरकार से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ लेना पड़ सकता है और एमको के रणनीतिकार इस मसले पर हरकत में आ भी चुके हैं।
एफडीआई कानून के मुताबिक देसी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम चलाने वाली विदेशी कंपनी अगर उसी क्षेत्र में किसी दूसरी भारतीय कंपनी के साथ गठजोड़ करेगी तो उसे पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करना होगा।
सैंडविक भारत में उत्खनन और निर्माण के अपने कारोबार का और विस्तार करना चाहती है और इसके लिए कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध और मूलरूप से तमिलनाडु की कंपनी रेवती इक्विपमेंट के अधिग्रहण के लिए बातचीत भी कर रही है।
सैंडविक-एमको जंग
दोनों कंपनियों का है एक ही संयुक्त उपक्रम
सैंडविक चाहती है प्रतिद्वंद्वी कंपनी में हिस्सेदारी
एम्को को गुजरा नागवार, सरकार से लर्गाई गुहार
मौजूदा एफडीआई प्रावधान बन सकते हैं रोड़ा