कोविड-19 वैश्विक महामारी की दूसरी लहर और जिंस कीमतों में तेजी एवं इनपुट लागत बढऩे के कारण मात्रात्मक बिक्री में गिरावट का प्रभाव चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनियों के राजस्व एवं मुनाफे पर दिख सकता है। बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी), तेल एवं गैस और धातु एवं खनन जैसे चक्रीय क्षेत्र की कंपनियों का प्रदर्शन एक बार फिर अन्य क्षेत्रों के मुकाबले बेहतर रहने के आसार हैं।
वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही के दौरान निफ्टी50 कंपनियों के एकीकृत शुद्ध लाभ में तिमाही आधार पर 10.1 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है। जबकि तिमाही के दौरान उनकी एकीकृत शुद्ध बिक्री में क्रमिक आधार पर 14 फीसदी की गिरावट दिख सकती है।
पहली तिमाही के दौरान आय में गिरावट से पता चलता है कि वैश्विक महामारी के बाद की अवधि में आय में सुधार अवरुद्ध हो गया है। इसका सबसे अधिक प्रभाव गैर-चक्रीय क्षेत्र की कंपनियों (बैंक, एनबीएफसी, ऊर्जा एवं धातु को छोड़कर) द्वारा महसूस किया जा सकता है।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने पिछले सप्ताह वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए और वह भी इस मोर्चे पर प्रभावित करने में विफल रही। पहली तिमाही के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ ब्रोकरेज के अनुमान के मुकाबले करीब 3.3 फीसदी कम रहा जबकि उसकी शुद्ध बिक्री अनुमान के मुकाबले 1.3 फीसदी कम रही।
सूचकांक में शामिल चक्रीय क्षेत्र की कंपनियों (बैंक, एनबीएफसी, ऊर्जा और धातु) की शुद्ध बिक्री में तिमाही आधार पर 16.1 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है जबकि उनके शुद्ध लाभ में तिमाही आधार पर 6.8 फीसदी की कमी दर्ज की जा सकती है।
सूचकांक में शामिल गैर-चक्रीय कंपनियों का एकीकृत शुद्ध लाभ करीब 48,000 करोड़ रुपये पर वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही के बराबर रहने की उम्मीद है। लेकिन यह वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही की रिकॉर्ड ऊंचाई 75,600 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है।
यह विश्लेषण मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज (एमओएफएसएल), कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (केआईई), येस सिक्योरिटीज, एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग, आईडीबीआई सिक्योरिटीज और फिलिप कैपिटल सहित विभिन्न ब्रोकरेज द्वारा वित्त वर्ष 2022 के लिए जारी आय अनुमानों पर आधारित है।
हालांकि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के कमजोर आधार का मतलब साफ है कि भारतीय उद्योग जगत पिछले 12 महीनों के दौरान औद्योगिक धातु एवं ऊर्जा कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद राजस्व और मुनाफे में दो अंकों की वृद्धि दर्ज कर सकता है।
सूचकांक में शामिल कपनियों की शुद्ध बिक्री वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 54 फीसदी बढ़कर 10.1 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। जबकि शुद्ध मुनाफा 230 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि के साथ 11.19 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। सूचकांक में शामिल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही के दौरान 1.33 लाख करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया था जो उसकी सर्वकालिक ऊंचाई है।
क्रिसिल रिसर्च के निदेशक हेतल गांधी ने पहली तिमाही के लिए अपने आय अनुमान में कहा है, ‘भारतीय उद्योग जगत वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही के लिए राजस्व में क्रमिक आधार पर 8 से 10 फीसदी की गिरावट दर्ज करेगा। इसे मुख्य तौर पर वाहन जैसे विवेकाधीन उपभोक्ता उत्पादों की बिक्री को हुए नुकसान का झटका लगेगा। कोविड संक्रमण की दूसरी लहर की रोकथाम के लिए कई राज्यों में लगाए लॉकडाउन से मात्रात्मक बिक्री प्रभावित हुई।’
केआईई ने भी उम्मीद जताई है कि जिंस कीमतों में तेजी का प्रभाव दिख सकता है। केआईई के संजीव प्रसाद, सुनीता बलदेव और अनिंद्य भौमिक ने अपने अनुमान में लिखा है, ‘हमारा मानना है कि पहली तिमाही के दौरान शुद्ध आय में क्रमिक आधार पर 11 फीसदी की गिरावट दिख सकती है। कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण पैदा हुए व्यवधान और कच्चे माल की लागत बढऩे से क्रमिक आधार पर मात्रात्मक बिक्री प्रभावित होगी।’
केआईई का मानना है कि बीएसई30 सूचकांक में शामिल कंपनियों के शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर 72 फीसदी की वृद्धि होगी लेकिन तिमाही आधार पर उसमें 3 फीसदी की गिरावट दिखेगी। जबकि निफ्टी50 सूचकांक में शामिल कंपनियों के शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 127 फीसदी की वृद्धि होगी लेकिन क्रमिक आधार पर 6 फीसदी की गिरावट दिखेगी।
फिलिप कैपिअल के विश्लेषकों के अनुसार, सालाना आधार पर राजस्व में सबसे अधिक वृद्धि धातु एवं वाहन क्षेत्र की कंपनियों में दिखेगी जबकि उसके बाद पूंजीगत वस्तु, बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स, विशेष रसायन, सीमेंट, खुदरा और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का स्थान रहेगा।
टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू और हिंडाल्को जैसी धातु एवं खनन कंपनियों के राजस्व और मुनाफे में सालाना एवं तिमाही दोनों आधार पर दमदार वृद्धि होने की उम्मीद है। इसे मुख्य तौर पर धातु कीमतों में तेजी से बल मिलेगा। दूसरी ओर, बैंकों की आय वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही के स्तर पर बरकरार रहेगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल और ओएनजीसी जैसी तेल एवं गैस क्षेत्र की कंपनियों के राजस्व और मुनाफे में सालाना आधार पर भारी वृद्धि होने की उम्मीद है जबकि तिमाही आधार पर इन कंपनियों की आय को झटका लग सकता है।