बड़े पैमाने पर तीब्र सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रदान करने वाले महामारी की मार झेल रहे हैं और उन्हें गंभीर वित्तीय दबाव, राजस्व हानि और कर्ज भुगतान करने में संकट से जूझना पड रहा है। डीएमआरसी को अब तक 1,510 करोड़ रुपये के करीब राजस्व का नुकसान हुआ है और हाल के एक पत्र के मुताबिक इसके कर्मचारियों का त्योहारी भत्ता 50 प्रतिशत कम कर दिया गया है। बहलहाल प्रभावित होने वालों में डीएमआरसी एकमात्र नहीं है, बल्कि मेट्रो सेवा का परिचालन करने वाली लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) और रिलायंस इन्फ्रा बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, क्योंकि वे छोटे स्तर पर काम कर रही हैं और इस क्षेत्र में नई हैं।
वित्तीय दबाव कम करने के लिए डीएमआरसी ने अपने गैर जरूरी व्यय टाल दिए हैं। साथ ही भत्ते और अनुषंगी लाभ को अगस्त से आधा कर दिया है। बहरहाल एलऐंडटी ने अपने समूह में वेतन में कोई कटौती नहीं की है। वहीं रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के ग्रुप चेयरमैन अनिल अंबानी ने सालाना आम बैठक में कहा कि प्रबंधन और कर्मचाारी दोनों ही वेतन में 50 प्रतिशत कटौती पर सहमति जताई है।
इसके पहले डीएमआरसी ने केंद्र से अनुरोध किया था कि कर्ज का भुगतान टाला जाना चाहिए या कॉर्पोरेशन को 1,100 करोड़ रुपये कर्ज के भुगतान में कुछ राहत दी जानी चाहिए। बहरहाल दिल्ली मेट्रो ने कर्ज के भुगतान में अब तक कोई चूक नहीं की है।
वित्त वर्ष 19 में जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) से 3,026.21 करोड़ रुपये कर्ज मिला था। डीएमआरसी ने जेआईसीए को 622.71 करोड़ रुपये कर्ज का भुगतान 2018-19 में किया और केंद्र सरकार को 440.94 करोड़ रुपये ब्याज दिया। यह जारी रखना दिल्ली मेट्रो के लिए आसान नहीं है, क्योंकि वह इस समय गंभीर वित्तीय संकट, राजस्व नुकसान और बकाये के भुगतान में अक्षमता के दौर से गुजर रही है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का परिचालन 151 दिन से ठप है और उसे 10 करोड़ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस हिसाब से अब तक दिल्ली मेट्रो को 1,510 करोड़ रुपये नुकसान हो चुका है। यह आंकड़े अभी और बढऩे की संभावना है क्योंकि गृह मंत्रालय ने सेवाएं बहाल करने के लिए अभी हरी झंडी नहीं दी है।
मेट्रो सिस्टम में राजस्व यात्रियों के किराये और गैर किराया बॉक्स कलेक्शन से आता है, जिसमें विज्ञापन और स्टेशनों पर खानपान की दुकानों व अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए जगह देने के एवज में किराये से आता है। डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने हाल ही में कहा था कि लॉकडाउन की घोषणा के पहले मेट्रो में यात्रियों की प्रतिदिन संख्या करीब 60 लाख पहुंच गई थी, जिससे मोटे तौर पर रोजाना 10 करोड़ रुपये राजस्व आता है। इसके अलावा विज्ञापन और किराये से भी राजस्व आता है।
हाल की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक डीएमआरसी ने 2018-19 में 6,461.52 करोड़ रुपये कमाए हैं, जिनमें यात्रियों के किराये, रियल एस्टेट, कंसल्टेंसी और बाहरी परियोजनाओं से हुई आमदनी शामल है। वहीं 2017-18 में दिल्ली मेट्रो को 6,210.94 करोड़ रुपये मिले थे। यातायात परिचालन से सालके दौरान 3,582.80 करोड़ रुपये कमाई हुई, जबकि कुल व्यय 2,558.56 करोड़ रुपये हुआ और परिचालन मुनाफा 1,024.24 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 19 में किराये से कुल आमदनी 3,119.02 करोड़ रुपये रही और अन्य क्षेत्रों ेस राजसस्व 3,342.02 करोड़ रुपये था। निजी ऑपरेटर रिलायंस इन्फ्रा (आरइन्फ्रा) की नियमित परिचालन के दौरान रोजाना का राजस्व 90 लाख रुपये था। मुंबई मेट्रो वन के परिचालन का काम 21 मार्च से रद्द है और 151 दिन से ट्रेनें खड़ी हैं। एक मोटे अनुमान से पता चलता है कि मेट्रो को अब तक 135.9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक वेतन में कटौती वरिष्ठता पर निर्भर है और मेट्रो परियोजना के कर्मचारियों पर भी लागू है।
एलऐंडटी हैदराबाद मेट्रो का परिचालन करती है। सालाना रिपोर्ट के मुताबिक एलऐंडटी मेट्रो रेल (हैदराबाद) का परिचालन से राजस्व वित्त वर्ष 2020 में 587.28 करोड़ रुपये था, जिसमें किराये व गैर किराये दोनों से आने वाला राजस्व शामिल है। इस हिसाब से रोजाना 1.6 करोड़ रुपये राजस्व आता है। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक 22 मार्च से परिचालन बंद होने के कारण एलऐंडटी को 241 करोड़ रुपये का अब तक नुकसान हुआ है। एलऐंडटी मेट्रो ने पूरे समूह और सहायक कंपनियों में वेतन की किसी कटौती की घोषणा नहीं की है।
डीएमआरसी ने अनुषंगी लाभों व भत्तों को घटाकर आधा कर दिया है, जो अगस्त से लागू होगा। विपरीत वित्तीय परिस्थितियों व मेट्रो सेवाओं का परिचालन न होने के कारण ऐसा किया गया है।