सबसे बड़ी सरकारी बिजली पारेषण कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन आफ इंडिया (पीजीसीआईएल) ने इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) की पेशकश की है। पावर ग्रिड ऐसा करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की पहली कंपनी बन गई है।
पीजीइनविट ने सार्वजनिक निर्गम के लिए 99-100 रुपये प्रति यूनिट मूल्य सीमा की पेशकश की है। इश्यू 29 अप्रैल को खुलेगा और 3 मई को बंद होगा। इनविट नए निर्गम से 4,993.5 करोड़ रुपये जुटाएगा और पीजीसीआईएल मौजूदा यूनिट्स के लिए भी 2,742 करोड़ रुपये का ऑफर फार सेल मुहैया करा रहा है। पीजीसीआईएल ने प्रस्तावित पीजीइनविट के लिए 10,384 करोड़ रुपये इंटरप्राइज वैल्यू के आधार पर 5 ‘आरंभिक पोर्टफोलियो संपत्तियों’ की पेशकश की है।
इनविट की प्रायोजक पीजीसीआईएल ने कहा है कि पेशकश से मिली शुद्ध आमदनी का इस्तेमाल शुरुआती पोर्टफोलियो संपत्तियों को ब्याज सहित कर्ज के समय पूर्व भुगतान के लिए ऋण देने और आम मकसद के लिए किया जाएगा।
इसकी पेशकश के मौके पर पीजीसीआईएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के श्रीकांत (फोटो में) ने कहा कि कंपनी भविष्य में और ज्यादा पारेषण संपत्तियों को इनविट में डालेगी। उन्होंने कहा, ‘पावर ग्रिड के पास 22,500 करोड़ रुपये निवेश वाली 18 परियोजनाएं हैं, जिनका निर्माण चल रहा है। हमारी योजना के मुताबिक भविष्य में इनविट के माध्यम से इनकी पेशकश की जाएगी। सरकार ने पॉवर ग्रिड को इनविट के माध्यम से टीबीसीबी की अन्य सहायक इकाइयों के मुद्रीकरण की अनुमति दी है, जिनका निर्माण चल रहा है या भविष्य में इनका अधिग्रहण किया जाएगा।’ पीजीसीआईएल बिजली पारेषण परियोजनाओं को दो माध्यम से अधिग्रहीत करती है- नामांकन, जिसमें केंद्र या राज्य सरकार परियोजना का आवंटन करती है या प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) के माध्यम से।
श्रीकांत ने कहा कि पीजीसीआईएल के मौजूदा टीबीसीबी पोर्टफोलियो में 5,000 करोड़ रुपये की परिचालन वाली संपत्तियां हैं और 7 निर्माणाधीन परियोजनाएं हैं, जिनकी अनुमानित लागत 12,200 करोड़ रुपये है। इनमें 4 परियोजनाएं अक्षय ऊर्जा लिंकिंग वाली हैं। उन्होंने कहा, ‘इन्हें इनविट में स्थानांतरित करने पर विचार किया जा सकता है। हम अक्षय ऊर्जा क्षेत्र और इंट्रा स्टेट पारेषण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देख रहे हैं। पीजीसीआईएल को हाल में 5 टीबीसीबी परियोजनाएं मिली थीं।’
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2020 में इनविट मॉडल पर पीजीसीआईएल की संपत्तियों के मुद्रीकरण की अनुमति दी थी। इसमें कहा गया है, ‘इस मंजूरी से पीजीसीआईएल को 7,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों के मुद्रीकरण में मदद मिलेगी। ये संपत्तियां, जो मुख्य रूप से हाई वोल्टेज पारेषण लाइनें व सबस्टेशन हैं, विशेष उद्देश्य इकाई (एसपीवी) के माध्यम से पीजीसीआईएल के अधीन हैं। संपत्ति मुद्रीकरण की इस प्रक्रिया से पीजीसीआईएल को नई व निर्माणाधीन परियोजनाओं के वित्तपोषण में मदद मिलेगी।’