छत पर सौर बिजली संयंत्र लगाने की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजीएमबीवाई) के अगले चरण की नीतिगत संरचना बन रही है, ऐसे में उद्योग जगत के दिग्गजों और विशेषज्ञों ने रूफटॉप सोलर (आरटीएस) के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) के एकीकरण, अलग तरह के समर्थन और नीतिगत निरंतरता की मांग की है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) को थिंक टैंक, उद्योगपतियों, विक्रेताओं और डिस्कॉम के साथ परामर्श के दौरान अन्य प्रस्तावों के साथ-साथ बीईएसएस के एकीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार के प्रस्ताव मिले हैं। एमएनआरई ने पिछले सप्ताह बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया था कि परामर्श प्रारंभिक चरण में हैं और कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिसका उद्देश्य कार्यान्वयन की राह में आ रही चुनौतियों की पहचान करना और आरटीएस पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक विकास का समर्थन करने के उपायों का पता लगाना है।
इस परिचर्चा में शामिल रहे द एनर्जी ऐंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) में फेलो और इलेक्ट्रिसिटी और रिन्यूएबल्स डिवीजन के निदेशक अलेख्या दत्ता के अनुसार बैटरी स्टोरेज की सुविधा से इसकी घरेलू खपत बढ़ सकती है, इससे ग्रिड पर निर्भरता कम हो सकती है और बिजली का बिल कम कर सकती है। उन्होंने कहा कि बैटरी से रिवर्स पावर फ्लो भी कम हो सकती है, साथ ही स्थानीय वोल्टेज का दबाव कम हो सकता है और डिस्कॉम को अत्यधिक मांग वाले समय में मांग के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
यदि बीईएसएस कंपोनेंट को योजना में शामिल किया जाता है तो इससे अग्रिम निवेश बढ़ सकता है और इसके लिए पूंजीगत सहायता की जरूरत होगी। सीएसईपी के एसोसिएट फेलो रोहित विजय ने कहा, ‘इस सपोर्ट को आंशिक रूप से अधिक मांग के समय वास्तविक डिस्चार्ज से जोड़ा जा सकता है, जब सिस्टम का मूल्य अधिक होता है।’
हालांकि उन्होंने कहा कि यह तभी लागू किया जा सकता है जब पात्रता को संचार योग्य इन्वर्टर या अधिसूचित प्रोटोकॉल के अनुरूप बैटरी प्रबंधन प्रणाली तक सीमित रखा जाए। उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस मॉडल से किरायेदारों और हाउसिंग सोसाइटियों में रहने वाले लोगों तक सौर बिजली पहुंच सकती है। उन्होंने नीतियों में अचानक बदवाल से बचने की भी मांग की है।