कोलकाता स्थित व्यवसायी एवं रुइया समूह के चेयरमैन पवन रुइया ने राष्ट्रीय एयरलाइन एयर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए अभिरुचि पत्र (ईओआई) सौंपा है।
कोलकाता के बिजनेस सर्किल में चर्चित रुइया ने जेसॉप ऐंड कंपनी, डनलप इंडिया और फाल्कन टायर्स जैसी वित्तीय दबाव वाली कंपनियों के सफल अधिग्रहण के बाद ‘टर्नअराउंड टाइकून’ के तौर पर ख्याति हासिल की थी। कंपनियों को बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल ऐंड फाइनैंशियल रीकंस्ट्रक्शन में शामिल किया गया था। टाटा समूह, कंपनी के कर्मचारी संगठन अन्य कंपनियों में शामिल हैं जिन्होंने एयर इंडिया में दिलचस्पी दिखाई है।
हालांकि रुइया इन कंपनियों का कायाकल्प करने में विफल रहे और सभी तीनों कंपनियों को श्रमिक अशांति और मौजूदा समय में परिसमापन से जूझ रही हैं।
इस घटनाक्रम से अवगत एक अधिकारी ने कहा कि तीन कंपनियों को राजनीतिक कारणों की वजह से चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘एयर इंडिया के साथ सरकार किसी भी कंपनी का मजबूती के साथ समर्थन करेगी, जो इस सौदे के लिए अनुकूल
स्थिति होगी।’
इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि रुइया समूह की ईओआई कांति कमर्शियल्स प्राइवेट लिमिटेड के अधीन कंसोर्टियम के नेतृत्व में सौंपी गई थी। कांति कमर्शियल्स रुइया समूह से संबंधित कंपनी है।
रुइया ने एयर इंडिया में अपनी दिलचस्पी के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
हालांकि सरकारी अधिकारियों और कोलकाता के मारवाड़ी व्यवसाय समुदाय पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि जब तक रुइया इस प्रयास के लिए किसी वित्तीय भागीदार या बड़ी कंपनी का साथ नहीं लेते, तब तक उन्हें पूरी तरह सफलता मिलने की संभावना नहीं है।
सौदे के लिए सलाहकार ईवाई द्वारा निर्धारित पात्र शर्त के अनुसार, एयरलाइन के लिए बोली लगाने के लिए पात्रता के तौर पर बोलीदाता की नेटवर्थ 3,500 करोड़ रुपये होनी चाहिए।