नैनो को बाजार में उतारना टाटा मोटर्स के लिए जबरदस्त फायदे का सौदा साबित होने जा रहा है।
दरअसल जगुआर और लैंडरोवर की खरीद और कार के मंद पड़े बाजार की वजह से नकदी की समस्या झेल रही इस कंपनी को नैनो की बुकिंग से ही खासी रकम मिलने की संभावना जताई जा रही है।
आंकड़े देखें, तो नैनो की बुकिंग से शुरुआती 3 महीनों में ही टाटा मोटर्स के पास कम से कम 5,000 करोड़ रुपये की राशि इकट्ठा हो जाएगी, जिसका इस्तेमाल वह अपनी मर्जी से कर सकती है। कंपनी को इस पर कोई ब्याज भी नहीं देना पड़ेगा।
नैनो के लिए कर्ज देने वाले बैंकों को भी 100 करोड़ रुपये कमाई होने की संभावना है। फॉर्म की बिक्री से ही कंपनी को करीब 15 करोड़ रुपये की कमाई होगी। ऑनलाइन बुकिंग के लिए फॉर्म की कीमत 200 रुपये है वहीं अधिकृत केंद्रों से फॉर्म लेने पर इसकी कीमत 300 रुपये होगी।
कैसे होगी कमाई : नैनो के बेस मॉडल की बुकिंग के लिए 95,000 रुपये, सीएक्स मॉडल के लिए 120,000 रुपये और एलएक्स मॉडल के लिए 140,000 रुपये देने होंगे। ऐसे में औसत बुकिंग राशि अगर 100,000 रुपये भी मान ली जाए, तो 5 लाख कारों की बुकिंग होने पर यह राशि 5,000 करोड़ रुपये होती है यानी टाटा को 3 महीने के लिए बिना ब्याज दिए यह रकम मिल जाएगी।
टाटा नैनो की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, पहली खेप में जिन्हें कार नहीं मिलेगी, उनकी रकम भी तब तक नहीं लौटाई जाएगी, जब तक वे खुद नैनो की प्रतीक्षा सूची से अलग नहीं होते। जैसे ही लॉटरी में उनका नाम आता है, कंपनी उनकी रकम रख लेगी और उन्हें ब्याज भी नहीं देगी। इस तरह कंपनी के पास 1,000 करोड़ रुपये की राशि बिना ब्याज के आ सकती है।
कैसे मिलेगा ब्याज: पूरी रकम देकर बुकिंग कराने वालों को पहली खेप में कार नहीं मिलने पर कंपनी 8.5 फीसदी ब्याज तभी देगी, जब वे प्रतीक्षा सूची से नाम हटा लेंगे।
कर्ज लेकर बुकिंग कराने पर ग्राहक को 2,999 रुपये का भुगतान करना होगा। कार नहीं मिलने पर भी यह रकम लौटाई नहीं जाएगी। बुकिंग के लिए 95,000 रुपये देने वाले ग्राहक भी अगर प्रतीक्षा सूची से हटते हैं, तो कंपनी 2,999 रुपये बतौर प्रशासनिक खर्च काटकर ही उन्हें रकम वापस करेगी।
नैनो का ‘नजराना’ ही बना देगा बिगड़ी तकदीर
अगर पांच लाख लोग फॉर्म खरीदते हैं तो 200 रुपये के ऑनलाइन फॉर्म और बिक्री केंद्र से 300 रुपये के फॉर्म से होने वाली आय 14 करोड़ रुपये तक होगी, जो कि नॉन रिफंडेबल होने के चलते नैनो के नाम नजर हो जाएगी।
अगर ये सभी पांच लाख लोग न्यूनतम बुकिंग राशि 95 हजार रुपये फॉर्म के साथ जमा भी करते हैं तो इससे लगभग 5000 करोड़ रुपये टाटा की झोली में पहुंच जाएंगे। यह राशि कम से कम तीन महीने तक तो टाटा के पास ही रहेगी, जब तक कि एक लाख लोगों का नाम लखटकिया की लॉटरी में निकल न जाए।
क्यों चाहिए टाटा को माल?
फिलहाल टाटा मोटर्स के पास महज 500 करोड़ रुपये की नकदी बची है। इसे बड़ी शिद्दत से अपनी कार्यपूंजी के लिए 7000 करोड़ रुपये की दरकार है। यही नहीं, जगुआर-लैंड रोवर के सौदे के लिए लिए गए लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज भी उसे जून तक ही चुकता करना है।