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ओवीएल: अफसर अधिग्रहण के खिलाफ

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Last Updated- December 08, 2022 | 9:04 AM IST

ओवीएल को भले ही सरकार की ओर से इंपीरियल एनर्जी खरीदने की अनुमति मिल गई हो।


लेकिन देश की दिग्गज तेल उत्खनन कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के वैज्ञानिक और तकनीकी अधिकारी ही इंपीरियल एनर्जी के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। इन अधिकारियों का कहना है कि अधिग्रहण के लिए इंपीरियल एनर्जी की कीमत अधिक लगाई गई है।

जबकि कंपनी की असल कीमत उतनी नहीं है। ओएनजीसी इंपीरियल एनर्जी को खरीदने के लिए करीब 10,500 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

ओएनजीसी के अधिकारियों के सबसे बड़े संगठन वैज्ञानिक और तकनीकी अधिकारियों के संगठन (एएसटीओ) ने पेट्रोलियम सचिव आर एस पांडेय और ओएनजीसी के चेयरमैन आरएस शर्मा को पत्र भी लिखा है।

इस पत्र में उन्होंने दलील दी है कि इंपीरियल की परिसंपत्ति जिन जगहों पर है वहां उत्खनन करने में काफी मुश्किल होगी। इससे अधिग्रहण और क्षेत्र विकसित कर वहां उत्खनन करने की लागत भी वसूल नहीं हो पाएगी।

ओएनजीसी की विदेशी इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) ने अगस्त में इसके अधिग्रहण के लिए 1,250 पैंस प्रति शेयर देने का ऑफर दिया था, जबकि उस समय इंपीरियल के शेयरों का दाम 1,050 पैंस प्रति शेयर चल रहा था। हालांकि यह बोली 30 दिसंबर तक खुली है।

इसके बाद ओवीएल को इंपीरियल के शेयरधारकों को दो हफ्तों में ही भुगतान करना होगा। ओएनजीसी ने जब अगस्त में इस अधिग्रहण के लिए बोली लगाई थी, तब से लेकर अभी तक कच्चे तेल की कीमतों में 60 फीसदी की गिरावट आई है।

डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने भी इस अधिग्रहण से होने वाले फायदे को शून्य कर दिया है।

एएसटीओ के अध्यक्ष अमित कुमार ने पत्र में लिखा है, ‘इस करार की कई बातें समझ से परे हैं। रूस की कंपनी रोजनेफ्ट ने भी इस कीमत पर किए जा रहे अधिग्रहण में हिस्सेदारी करने से इनकार कर दिया है। रोजनेफ्ट भी इंपीरियल एनर्जी के तेल क्षेत्र और असली कीमत से वाकिफ है।’

कच्चे तेल की कीमत 121 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से ओवीएल की बोली से कंपनी को 10 फीसदी आंतरिक प्रतिफल मिलने की संभावना थी। घटती कीमत और कमजोर होते रुपये के कारण यह दर घटकर 3-4 फीसदी हो गई है।

पत्र में लिखा है, ‘फिलहाल इंपीरियल का रोजाना उत्पादन 12,000 प्रतिबैरल बताया गया है। लेकिन यह आंकड़ा विवादास्पद है, क्योंकि जिस तकनीकी टीम ने तेल क्षेत्र का दौरा किया था उसके मुताबिक यह आंकड़ा 8,000 बैरल प्रतिदिन ही है।

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First Published - December 15, 2008 | 12:15 AM IST

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