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कुवैत ठेके की दौड़ में ओटीबीएल भी

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Last Updated- December 10, 2022 | 8:35 PM IST

तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) और द एनर्जी ऐंड रिसोर्सेज इंस्टीटयूट (टेरी) का संयुक्त उपक्रम ओएनजीसी-टेरी बायोटेक लिमिटेड (ओटीबीएल) कुवैत में मौजूद दुनिया के सबसे बड़े तेल कचरे को साफ करने की होड़ में शामिल है।
चालीस अरब डॉलर से अधिक की यह परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरण शुद्धिकरण परियोजना बताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन द्वारा निकाली गई इस निविदा के पहले चरण में ओएनजीसी सफल रही है।
गौरतलब है कि तेल कचरा तरल पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन है, जो प्रदूषण का एक प्रकार है। सूत्रों के मुताबिक, यह परियोजना 40 अरब डॉलर से बड़ी हो सकती है। इसकी फंडिंग विश्व बैंक करने वाला है।
ओटीबीएल के चेयरमैन ए. के. हजारिका ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ”कुवैत में ऑयलौप्पर टेक्नोलॉजी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन करने वाली हम पहली कंपनी हैं। हमने उन्हें दिखाया कि कैसे यह तकनीक सुमद्र में 200 वर्ग किलोमीटर में फैले कचरे को बड़ी सफाई से दूर कर सकती है। हमारी तकनीक को स्वीकार करते हुए उन्होंने हमसे 3 अरब डॉलर की परियोजना के लिए निविदा जमा करने को कहा।”
1991 के खाड़ी युद्ध में पैदा हुए कचरे को दूर करने की यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से 2006 में शुरू की गई थी। इस होड़ में चीन की कोई भी कंपनी शामिल नहीं है, लिहाजा ओटीबीएल को उम्मीद है कि यह ठेका उसकी झोली में आ जाएगा।
हजारिका के मुताबिक, यह ठेका पा लेने के बाद कुवैत में उत्पादन, वितरण और विपणन के कई कारोबारों में ओटीबीएल की संभावनाओं के रास्ते खुल जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, परियोजना के दूसरे चरण के लिए जल्द ही ठेका निकाला जाएगा। उम्मीद है कि यह ठेका 2.8 अरब डॉलर का होगा। उल्लेखनीय है कि ओटीबीएल में टेरी के 47 फीसदी शेयर हैं, जबकि ओएनजीसी के 49 फीसदी।
ओटीबीएल के एक अधिकारी के मुताबिक, कंपनी ने पहली बार ऑयलजैप्पर तकनीक अपनाई है। गुजरात के मेहसाना में तेल कुएं से उत्पन्न कचरे को दूर करने के लिए अपनाई गई इस तकनीक का काफी बढ़िया परिणाम दिखा है। पानी इतना साफ हो गया कि अब यह पक्षियों और मछलियों के लिए स्वर्ग बन गया है।
इस तकनीक के तहत सूक्ष्मजीव पैदा किया जाता है। ये सूक्ष्मजीव तेल भक्षण करते हैं, जिससे पानी साफ हो जाता है। कई देशों की नजर इस तकनीक पर गई है। भारत में ओटीबीएल की योजना है कि इस तकनीक को ऑयल इंडिया और एचपीसीएल के तेल कचरे को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाए।

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First Published - March 18, 2009 | 10:53 PM IST

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