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तेल एवं गैस खोज में विदेशी तकनीकी साझेदारों को मिलेगा अस्वीकार करने का पहला अधिकार, पुरी ने किया बड़ा ऐलान

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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सीआईआई के सम्मेलन में विदेशी तकनीकी साझेदार के विषय में यह बात कही

Last Updated- May 30, 2025 | 11:06 PM IST
Hardeep Singh Puri
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी | फाइल फोटो

भारतीय कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी करने वाली विदेशी कंपनियां अगर कच्चा तेल एवं गैस खोजेंगी तो उन्हें पहले अस्वीकार करने का अधिकार (फर्स्ट राइट टू रिफ्यूजल) दिया जाएगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारतीय उद्योग परिसंघ(सीआईआई) के सालाना कारोबार सम्मेलन में यह जानकारी दी। पुरी ने कहा कि मुंबई हाई में सरकार नियंत्रित ओएनजीसी की बीपी के साथ हाल में की गई साझेदारी और अंडमान सागर बेसिन में ऑयल इंडिया लिमिटेड की ब्राजील की कंपनी पेट्रोबास के साथ साझेदारी में ऐसे प्रावधान हैं।

सीआईआई के कार्यक्रम में पुरी ने कहा कि विदेशी कंपनियों को तेल एवं गैस की खोज के लिए भारी भरकम रकम निवेश करना पड़ता है मगर कभी-कभी वे इसके लिए तैयार नहीं रहती हैं। पुरी ने कहा, इस झंझट से बचने के लिए वे तकनीकी साझेदारी के रूप में भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करें तो अच्छा होगा। इसके लिए उन्हें भुगतान भी किया जाएगा और जब वे ऊर्जा की खोज करेंगी तो पहले अस्वीकार करने का अधिकार भी दिया जाएगा। पुरी ने इस बात के भी संकेत दिए कि तेल एवं गैस क्षेत्र के लिए प्रतिस्पर्द्धात्मक बोलियां लगाने के बजाय विदेशी कंपनियां इस नए विकल्प को आजमा सकती हैं। मंत्री ने कहा कि यह विदेशी कंपनियों और भारत दोनों के लिए अच्छा रहेगा।

ओएनजीसी ने बंबई हाई में उत्पादन बढ़ाने के लिए फरवरी में एक समझौता किया था। मुंबई हाई अरब सागर में 1,16,000 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के मुंबई ऑफशोर बेसिन का हिस्सा है और भारत का सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है। इसमें 1976 से उत्पादन हो रहा है। इस समझौते के तहत बी पी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई बी पी एक्सप्लोरेशन (अल्फा) लिमिटेड तकनीकी सेवा प्रदाता (टीएसपी) साझेदार के रूप में चुनी गई। ओएनजीसी ने तब कहा था, टीएसीपी ने अनुबंध की 10 वर्ष की अवधि के दौरान तेल एवं तेल समतुल्य गैस उत्पादन में आधार उत्पादन स्तर से भारी बढ़ोतरी (लगभग 60 प्रतिशत) के संकेत दिए थे।

ओआईएल ने अंडमान क्षेत्र में तेल उत्पादन बढ़ाने में ब्राजील की कंपनी पेट्रोबास की विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उसके साथ फरवरी में एक समझौता किया था। इस समझौते में महानंदी एवं अन्य अवसादी बेसिन क्षेत्र आते हैं।

सरकार पहले उत्पादन साझा करने की प्रणाली अपनाती थी मगर 2016 में उसने राजस्व साझा करने की पद्धति की तरह कदम बढ़ाया। पुरी ने कहा कि कानूनी विवाद और मतभेदों को देखते हुए सरकार को नई प्रणाली की तरफ कदम बढ़ाना पड़ा। उन्होंने कहा, राजस्व साझा समझौता तुलनात्मक रूप से आसान है। कई विदेशी कंपनियां पहले निवेश करने में आनाकानी करती हैं।

पुरी ने तेल समृद्ध दक्षिणी अमेरिकी देश गुयाना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंडमान सागर में गुयाना की तरह तेल के कई भंडार हो सकते हैं। उन्होंने कहा, अंडमान में एक बड़ी खोज सामने आ गई तो यह सब कुछ बदल कर रख देगी। भारत की आर्थिक ताकत में यह एक बड़ा बदलाव होगा।

जमीन में तेल का एक कुआं तैयार करने पर 4 लाख डॉलर खर्च आता है जबकि समुद्री क्षेत्र में इस पर लगभग 10 करोड़ डॉलर लागत आती है। पुरी ने कहा कि गुयना ने 47 कुएं खोदे उसके बाद उन्हें तेल के भंडार का पता चला। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी ने वित्त वर्ष 2025 में सबसे अधिक 37 कुएं खोदे।

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First Published - May 30, 2025 | 10:51 PM IST

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