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Tata Sons में नेतृत्व का सस्पेंस: चंद्रा के तीसरे कार्यकाल पर टाटा ट्रस्ट्स का रुख अब भी बरकरार

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टाटा संस में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार और कंपनी की लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के बीच खींचतान जारी है, जिस पर सरकार भी नजर रख रही है

Last Updated- March 01, 2026 | 9:59 PM IST
N. Chandrasekaran
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन | फाइल फोटो

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल देने की सिफारिश करने वाला टाटा ट्रस्ट्स का प्रस्ताव ट्रस्टियों द्वारा सर्वसम्मति से पारित किए जाने के लगभग छह महीने बाद भी वैध है। मामले से अवगत सूत्रों ने यह जानकारी दी। एक सूत्र ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि नेतृत्व के मुद्दे पर टाटा ट्रस्ट्स के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

टाटा संस की 24 फरवरी को हुई बोर्ड बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने क​थित तौर पर समूह के कुछ कारोबार से संबंधित चिंताएं जाहिर कीं। साथ ही उन्होंने चंद्रशेखरन के सेवा विस्तार पर निर्णय लिए जाने से पहले यह आश्वस्त करने का आग्रह किया कि मूल कंपनी को सूचीबद्ध नहीं कराया जाएगा। ऐसे में पिछले साल पारित चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल से संबं​धित प्रस्ताव पर सवालिया निशान लग गया। टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने सितंबर 2025 में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें चंद्रा के नाम से चर्चित एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर 5 साल का एक और कार्यकाल देने की सिफारिश की गई थी।

चंद्रा ने पिछले सप्ताह आयोजित बोर्ड बैठक में संकेत दिया था कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच सहमति के बिना उनके कार्यकाल के नवीनीकरण पर कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। समझा जाता है कि नमक से लेकर सेमीकंडक्टर तक बनाने वाले इस दिग्गज कारोबारी समूह के घटनाक्रम पर सरकार करीबी नजर रख रही है। पिछले साल कैबिनेट के शीर्ष मंत्रियों ने टाटा ट्रस्ट्स के भीतर पैदा हुए मतभेदों को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया था। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है।

टाटा संस टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है जिसका बाजार पूंजीकरण करीब 400 अरब डॉलर आंका गया है। एक अन्य सूत्र ने कहा कि 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद से ही टाटा ट्रस्ट्स के भीतर लगातार उथल-पुथल दिख रही है। इसलिए सरकार भी टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने के पक्ष में हो सकती है।

सितंबर 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के तौर पर नामित किया गया था। ऐसे में टाटा संस को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना अनिवार्य हो गया है। आरबीआई ने ऊपरी स्तर की प्रमुख निवेश कंपनी के वर्गीकरण में बदलाव संबंधी टाटा के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है। टाटा संस ने भी आगे की राह के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है। टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर बरकरार रहना चाहिए।

इस संबंध में जानकारी के लिए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा सहित ट्रस्टियों को भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला। 

सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व के कार्यकाल के नवीनीकरण का मामला लंबित रहने के बावजूद टाटा ट्रस्ट्स ने अब तक इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए कोई बैठक नहीं की है।

चंद्रा अब 62 वर्ष के हो चुके हैं। उन्होंने साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के चार महीने बाद 21 फरवरी, 2017 को टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की कमान संभाली थी। अगर टाटा संस का निदेशक मंडल चंद्रा के कार्यकाल के नवीनीकरण को मंजूरी देता है तो वह संभवत: 2032 तक समूह का नेतृत्व करेंगे।

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First Published - March 1, 2026 | 9:59 PM IST

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