नैसकॉम के 7 साल तक अध्यक्ष रहे किरण कार्णिक सुर्खियों से बचना चाहते थे, पर सत्यम की घटना ने उन्हें फिर से चर्चा में ला दिया है।
बीते 3 महीनों में उन्होंने लगातार काम किया है। फिलहाल सत्यम बोर्ड के अध्यक्ष किरण कार्णिक ने लेस्ली डिमोंटी से सत्यम के आगे के सफर पर बात की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश:
कंपनी लॉ बोर्ड चाहता है कि मौजूदा बोर्ड बना रहे। पर कब तक?
बोर्ड एक महीने भी रह सकता है और छह हफ्ते भी या इससे ज्यादा भी। स्पष्ट तौर पर मुझे भी नहीं पता कि यह कब तक रहेगा। सरकार के पास बोर्ड को बनाए रखने की कुछ वाजिब वजह जरूर होगी। इन वजहों में से कुछ को तो मैं समझ रहा हूं। मैं यह अच्छी तरह जानता हूं कि सभी 6 लोगों को सत्यम बोर्ड में नहीं रहना चाहिए। हममें से किसी को तो जाना ही चाहिए।
यह एक निजी कंपनी है। कुछ खास वजह से सरकार ने दखल दिया था। अब इसे जल्द ही पूरी तरह से निजी हाथों में सौप दिया जाना चाहिए। जहां तक मेरा सवाल है मैं इससे बाहर निकलना चाहता हूं। मेरा काम पूरा हो गया है।
महिंद्रा के हाथों में सत्यम को सौंपने की प्रक्रिया कैसे पूरी हो पाएगी?
इसका खाका तैयार हो चुका है। हमारी पूरी कोशिश है कि इस काम को अच्छी तरह पूरा किया जा सके। मौजूदा हालत में मैं इतना ही कह सकता हूं कि टेक महिंद्रा एक अच्छी कंपनी है। इसके बोर्ड में सक्षम लोग हैं। वे अपने दम पर इस स्थिति से निपटने में सक्षम हैं। बस दो शर्तें हैं।
पहला यह कि वे तीन साल तक इसकी पूंजी नहीं बेच सकते औैर दूसरी यह कि इसकी संपत्ति दो साल तक नहीं बेच सकते। इसके अलावा टेक महिंद्रा कंपनी चलाने के लिए कोई भी कदम उठा सकती है।
क्या इसका मतलब ये हुआ कि सरप्लस कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने को कहा जा सकता है?
सैद्धांतिक तौर पर सूची में शामिल 100 लोगों को छोड़कर दूसरों के साथ तो वे ऐसा कर सकते हैं। इन लोगों को एक साल तक नहीं हटाने की शर्त बोर्ड ने जोड़ी है न की सरकार ने। इसके अलावा और कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।
क्या सत्यम के पास अतिरिक्त कर्मचारी है?
मैं सही संख्या नहीं बता सकता। ये संख्या निश्चित रुप से सैंकड़ों में नहीं है। पर कुछ खबरों में जितना बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है, उतनी भी नहीं है (4,000-5,000 होने का संकेत)। टेक महिंद्रा के पास कुछ विकल्प जरूर हैं। पहला कि अतिरिक्त लोगों को निकाल दें।
दूसरा यह है कि बेहतर योग्यता और प्रशिक्षण वाले इन लोगों का इस्तेमाल करके अतिरिक्त कारोबार जुटाए। साल अंत तक स्थिति में जरूर सुधार आएगा। तीसरा विकल्प यह कि सत्यम के सभी कर्मचारियों के वेतन में 10 फीसदी कटौती कर दी जाए।
क्या आपने या बोर्ड के किसी और सदस्य ने महिंद्रा समूह से इस मसले पर कोई बातचीत की है?
हम औपचारिक तौर नए खरीदार से किसी मसले पर तब तक बात नहीं कर सकते जब तक की पूरा धन जमा न हो जाए। ये महज सुझाव हैं। आखिरी फैसला टेक महिंद्रा बोर्ड पर ही निर्भर करता है। हालांकि, महिंद्रा एक अच्छा और जाना-माना समूह है।
सत्यम के ग्राहकों की कैसी प्रतिक्रिया है?
मैंने सत्यम के टॉप 20 ग्राहकों से व्यक्तिगत तौर पर बात की है। वे मानते हैं कि अनिश्चितता खत्म हो गई है। वे खुश हैं कि महिंद्रा ने सत्यम को खरीदा है।