कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बुधवार को रुपये में भारी गिरावट आई। यह इस साल 8 जून के बाद इसमें सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट है। डीलरों ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता खत्म हो गया है, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 6 फीसदी की उछाल आई और अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ। इस बयान से पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति में बाधा पड़ने की चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।
घरेलू मुद्रा 95.56 प्रति डॉलर पर बंद हुई जबकि एक दिन पहले यह 94.97 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। रुपये ने दिन के दौरान 95.61 प्रति डॉलर का निचला स्तर छुआ। डीलरों का कहना है कि सरकारी बैंकों ने शायद आरबीआई की ओर से डॉलर बेचे, जिससे रुपये में और गिरावट सीमित रही।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, एशियाई मुद्राओं में भारतीय रुपया सबसे ज्यादा गिरा। इसकी वजह ईरान के साथ संघर्षविराम खत्म करने के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बाजार में जोखिम से बचने का रुझान होना है। भूराजनीतिक चिंताओं ने ज्यादा उतार-चढ़ाव के बीच जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है। निकट भविष्य में रुपये को 95.80 प्रति डॉलर पर प्रतिरोध और 94.95 प्रति डॉलर पर समर्थन मिलने की उम्मीद है। अभी डॉलर की कीमत बढ़ने का रुझान ज्यादा दिख रहा है।
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर सभी उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा, लेकिन बुधवार को एशियाई मुद्रा में रुपये का सबसे खराब प्रदर्शन रहा। बेंचमार्क 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 7 आधार अंक बढ़कर 6.76 फीसदी पर बंद हुई। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, दिन के दूसरे हिस्से में कच्चे तेल और अमेरिकी यील्ड में बढ़ोतरी के कारण बाजार में बॉन्डों की बिकवाली हुई।
हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में कमी और विदेशी मुद्रा लाने के लिए किए गए नीतिगत उपायों की वजह से रुपये में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन पश्चिम एशिया में फिर से पैदा हुई अनिश्चितता ने बाजार का ध्यान वापस तेल की ओर कर दिया है। ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बाद से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 4.8 फीसदी कमजोर हुआ है, जिससे यह इस दौरान सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्राओं में से एक बन गया है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी है। तनाव शुरू होने के बाद से बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड में 10 आधार अंक की बढ़ोतरी हुई है।
साल 2026 में डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक 5.95 फीसदी कमजोर हुआ है जबकि बेंचमार्क 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 18 आधार अंक बढ़ी है। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष में रुपया 0.79 फीसदी गिरा है जबकि 10 साल की यील्ड 27 आधार अंक कम हुई है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, आरबीआई को पहले 95.50 रुपये प्रति डॉलर और बाद में 95.60 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर समर्थन देते देखा गया। तेल की कीमतें बढ़ने की खबर के बाद तेल कंपनियों और एफपीआई ने डॉलर खरीदने शुरू कर दिए। आज की इस हलचल की मुख्य वजह घरेलू फंडामेंटल नहीं थे और सुबह के समय पूंजी के आने से गिरावट को संभालने में मदद मिली।