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अधिग्रहण से चढ़े मैट्रिक्स के शेयर

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Last Updated- December 10, 2022 | 9:52 PM IST

जैसे ही माइलान इंक. ने हैदराबाद की कंपनी मैट्रिक्स लैबोरेटरीज की शेष 29 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का निर्णय किया, बंबई स्टॉक एक्सचेंज में शुक्रवार को मैट्रिक्स के शेयर चढ़ गए।
अमेरिका की कंपनी माइलान ने अगस्त 2006 में मैट्रिक्स की 71.2 फीसदी हिस्सेदारी 73 करोड़ 60 लाख डॉलर में खरीदे थे। माइलान ने शुक्रवार को यह घोषणा की कंपनी की बाकी हिस्सेदारी 13 करोड़ 30 लाख डॉलर में खरीदेगी।
मैट्रिक्स के शेयर बंबई स्टॉक एक्सचेंज में शुक्रवार को 141.40 रुपये पर बंद हुए। गुरुवार को कंपनी के शेयर 117.85 रुपये पर बंद हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले एक या दो कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर और चढ़ सकते हैं और इस वजह से माइलान को ज्यादा ऑफर मूल्य चुकानी पड़ सकती है।
माइलान के उपाध्यक्ष और प्रमुख कार्यकारी रॉबर्ट जे. कूअरी ने कहा, ‘मैट्रिक्स के बचे शेयर खरीदने से कंपनी को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी और वाणिज्यिक परियोजना को सफलतापूर्वक चलाने के लिए एक प्लेटफॉर्म मिल जाएगा।’ मैट्रिक्स में चार विदेशी कंपनियों की भी 14.02 फीसदी की हिस्सेदारी है।
दिसंबर 2008 की पब्लिक फाइलिंग के मुताबिक मैट्रिक्स में 7.13 फीसदी शेयर एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फंड, 3.70 फीसदी मेरिल लिंच कैपिटल मार्केट, 1.73 फीसदी स्विस फाइनैंस कॉर्पोरेशन  और मास्टर ट्रस्ट बैंक ऑफ जापान एवं एचएसबीसी इंडियन इक्विटी मदर फंड की 1.46 फीसदी की हिस्सेदारी है।
इजरायल की टेवा फार्मास्युटिकल और नोवार्टिस की जेनेरिक कंपनी सैंडोज के बाद दुनिया की सबसे बड़ी तीसरी कंपनी माइलान ने कहा है कि वह मैट्रिक्स के बाकी शेयर अपने सुरक्षित नकदी के जरिये करेगी। माइलान का कहना है कि 26 मार्च को मैट्रिक्स के शेयर जितने पर बंद हुए, उसमें 27 फीसदी का इजाफा हुआ है। अगर पिछले महीने के मुकाबले देखें, तो यह बढ़ोतरी 54 फीसदी के करीब है।
माइलान की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अगर शेयरधारक ऑफर स्वीकार करते हैं, तो कुल प्रमोटर शेयर होल्डिंग, जिसमें 4.97 फीसदी शेयर कंपनी के पूर्व मालिक एन. प्रसाद के नाम से भी है, के बकाया शेयर 90 फीसदी हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में मैट्रिक्स के शेयर को बंबई स्टॉक एक्सचेंज और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज से गैर सूचीबद्ध कर दिया जाएगा।
गैर सूचीबद्ध की प्रक्रिया में लगभग 12 हफ्तों का वक्त लगता है, क्योंकि इसके लिए नियामकों की मंजूरी जरूरी होती है। इस घोषणा के बाद मेरिल लिंच-बैंक ऑफ अमेरिका ने मैट्रिक्स की अपनी कवरेज को खत्म कर दिया है। उसका कहना है कि कम कीमतों की वजह से इसके शेयरों में लोगों की रुचि बेहद कम हो गई है।
कंपनी ने निवेशकों के साथ पूरा विर्मश भी नहीं किया। पहले भी भारत में काम करने वाली दवा कंपनियां अधिग्रहण के बाद खुद को गैर सूचीबध्द करवा चुकी हैं। मिसाल के तौर पर पार्क डेविस और फार्मेसिया हेल्थकेयर फाइजर द्वारा अधिग्रहण के बाद खुद को शेयर बाजार से 2004 और 2005 में गैर सूचीबध्द करवा चुकी हैं।
बोरग्गस वेलकम (इंडिया) भी ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन फार्मा-स्युटिकल्स का खुद पर कब्जा होने के बाद शेयर बाजारों से अलग हो चुकी है। इसी तरह स्मिथक्लाइन बीचम फार्मास्युटिकल्स (इंडिया) भी ग्लैक्सो इंडिया के साथ मिलने के बाद खुद शेयर बाजार से अलग कर चुकी है।

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First Published - March 28, 2009 | 5:40 PM IST

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