बीएस बातचीत
ऐक्सिस सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी बी गोपकुमार ने ऐश्ली कुटिन्हो के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि यदि कोविड के मामले तेजी से घटते हैं और लॉकडाउन पहली तिमाही तक सीमित रहता है तो बाजार अच्छा प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि वित्त क्षेत्र की बड़ी कंपनियां अच्छी बाजार भागीदारी हासिल करेंगी और अपने बहीखाते के बेहतर प्रबंधन में सफल रहेंगी। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:
इस साल भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सबसे बड़े जोखिम क्या हैं?
भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम कोविड को लेकर अनिश्चितता है। कोविड की रफ्तार के साथ साथ टीकाकरण की गति को समझना भी महत्वपूर्ण होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में अच्छा सुधार देखा गया है। हालांकि दूसरी लहर और उससे संबंधित लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था ही राह में बड़ी चुनौती पैदा की है। यदि कोविड के मामले तेजी से घटते हैं और लॉकडाउन पहली तिमाही तक ही सीमित रहता है तो इक्विटी बाजार बढिय़ा प्रदर्शन करेंगे। यदि लॉकडाउन दूसरी तिमाही में भी बरकरार रहा तो अर्थव्यवस्था पर प्रभाव बहुत ज्यादा पड़ेगा। इसलिए यह जरूरी है कि कोविड की राह ज्यादा मजबूत न हो और इस संक्रमण की चेन जल्द से जल्द टूटे।
मौजूदा मूल्यांकन पर आपकी क्या राय है?
मूल्यांकन आय वृद्घि के साथ साथ उसकी निरंतरता पर आधारित है। वित्त वर्ष 2021 ने भारतीय कंपनियों की मजबूती और वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही तक वृद्घि परिदृश्य में सुधार को साबित किया है। इस समय में, अल्पावधि चुनौतियों को छोड़कर, वृद्घि का परिदृश्य आकर्षक दिख रहा है। इसलिए 20 गुना के एक वर्षीय आगामी आय पर निफ्टी का मौजूदा मूल्यांकन वित्त वर्ष 2021-24 के दौरान 18 प्रतिशत की आय सीएजीआर के साथ आकर्षक दिख रहा है।
क्या आप मानते हैं कि प्रमुख सूचकांकों का मजबूत प्रदर्शन बरकरार रहेगा?
मिड-कैप और स्मॉल-कैप ने 2018 के शुरू से 2019 के अंत तक कमजोर प्रदर्शन किया। मिड-कैप और स्मॉल-कैप को 2020 में लंबे समय तक कमजोरी का सामना करना पड़ा। साथ ही वित्त वर्ष 2022 भी आय सुधार का वर्ष रहेगा और इसलिए मिड-कैप तथा स्मॉल-कैप द्वारा अच्छा प्रदर्शन किए जाने की संभावना है, क्योंकि उनमें बेहतर विकास की संभावनाएं हैं। इसके अलावा, हम यह भी देख रहे हैं कि बाजार अस्थिरता सीमित दायरे में बनी हुई है जो स्मॉल-कैप और मिड-कैप के लिए अच्छी है।
आने वाले महीनों में आप कौन से क्षेत्रों पर दांव लगाना पसंद करेंगे?
मांग संबंधित चुनौतियों की वजह से वाहन, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, और रिटेल एनबीएफसी का प्रदर्शन कमजोर रहने की आशंका है। वाहन क्षेत्र में मार्जिन संबंधित चुनौतियां हैं, क्योंकि उत्पादन लागत दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, छोटे बैंकों पर नई लॉकडाउन संबंधित सख्ती की वजह से दबाव बने रहने की आशंका है। हालांकि आईटी, फार्मा, धातु, इन्फ्रा और उद्योग जैसे कई क्षेत्रों का प्रदर्शन अच्छा बना रह सकता है, क्योंकि उन पर लॉकडाउन का बेहद सीमित प्रभाव पड़ेगा।
बैंकिंग और एनबीएफसी शेयरों पर आपकी क्या राय है?
बीएफएसआई क्षेत्र में स्थिति एक समान नहीं रहेगी। बड़ी कंपनियां बाजार भागीदारी हासिल करेंगे और अपने बहीखातों का प्रबंधन बेहतर ढंग से करेंगी। इसलिए, रिटेल केंद्रित छोटे बैंकों या एनबीएफसी के लिए चुनौतियां होंगी।
वे अभी भी चिंताओं से बाहर नहीं निकली हैं।
घरेलू ब्रोकरों को पिछले वित्त वर्ष में कारोबारी गतिविधि में भारी तेजी और रिटेल भागीदारी में वृद्घि का लाभ मिला है। आप इस उद्योग के लिए वित्त वर्ष 2022 में किस तरह के रुझान की संभावना देख रहे हैं?
ऐक्टिव ब्रोकिंग खातों की पैठ कुल आबादी के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत है। हम वित्त वर्ष 2022 में समान रुझान देखेंगे। इन उभरते रुझानों को बैंक सावधि जमा दरों में कमी जैसे कारकों से समर्थन मिला है, जिससे ग्राहक इक्विटी बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं, चाहे यह डायरेक्ट इक्विटी के स्वरूप में हो या म्युचुअल फंडों के जरिये। इसके अलावा, अप्रैल 2021 में एयूएम का शानदार पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया।