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ट्रैक्टर से आगे बढ़कर फुल-स्केल फार्म मशीनीकरण पर महिंद्रा का बड़ा दांव

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इसमें हार्वेस्टर, बेलर, सीड ड्रिल और टेलीमैटिक्स-आधारित सेवाएं शामिल हैं, जिन्हें कंपनी अपनी आगामी वृद्धि का माध्यम मान रही है

Last Updated- June 09, 2026 | 3:59 PM IST
Swaraj tractors

भारत के ट्रैक्टर बाजार में रिकॉर्ड 43.6 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के बाद महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) अब ट्रैक्टर की बिक्री से आगे बढ़कर खेती के मशीनीकरण के एक बड़े तंत्र पर दांव लगा रही है। इसमें हार्वेस्टर, बेलर, सीड ड्रिल और टेलीमैटिक्स-आधारित सेवाएं शामिल हैं, जिन्हें कंपनी अपनी आगामी वृद्धि का माध्यम मान रही है।

यह बदलाव इसलिए हो रहा है क्योंकि कंपनी का कृ​षि मशीनरी व्यवसाय उसके मुख्य ट्रैक्टर बिजनेस की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, भले ही उसका शुरुआती आधार बहुत छोटा था। फार्म मशीनरी (Farm Machinery) कारोबार से कंपनी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में सालाना आधार पर 32 फीसदी बढ़कर 1,354 करोड़ रुपये हो गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 में 1,024 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023-24 में 866 करोड़ रुपये था।

इसके मुकाबले, कंपनी के ट्रैक्टर कारोबार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 42,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू अर्जित किया। यह दोनों कारोबारों के बीच बड़े पैमाने के अंतर को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह भी बताता है कि फार्म मशीनरी कारोबार में आगे विस्तार और वृद्धि की काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

एमऐंडएम का कहना है कि भारतीय खेती में विकास का अगला दौर न सिर्फ किसानों के ट्रैक्टर खरीदने से आएगा, बल्कि उन ग्रामीण उद्यमियों के बढ़ते नेटवर्क से भी उसे मजबूती मिलेगी, जिनके पास मशीनों का बेड़ा है और जो छोटे किसानों को किराए पर मशीनीकरण की सुविधाएं देते हैं।

एमऐंडएम के ​कृ​षि उपकरण व्यवसाय के अध्यक्ष विजय नाकरा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘कई किसान पैकिंग मशीनीकरण का खर्च नहीं उठा सकते। ऐसे में ग्रामीण उद्यमी ये उपकरण ‘पे-पर-यूज’ (इस्तेमाल के हिसाब से पेमेंट) के आधार पर उपलब्ध कराते हैं।’

नाकरा ने कहा कि इस रुझान से ग्रामीण उद्यमियों के लिए ज्यादा मौके बन सकते हैं और मशीनीकरण तक पहुंच बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम ग्रामीण भारत में बेहतर कौशल, उद्यमिता और आय के अवसर पैदा कर सकें, तो लोग अपने परिवारों को छोड़कर शहरों की ओर क्यों जाना पसंद करेंगे?’

कृ​षि की पूरी वैल्यू चेन में मशीनीकरण का स्तर अभी भी कम है। इससे खेती के दूसरे क्षेत्रों की तुलना में, ट्रैक्टरों के अलावा मशीनीकरण का बड़ा हिस्सा बनाने वाले उपकरणों जैसे रोटावेटर, टिलर वगैरह से आगे बढ़कर विकास की काफी गुंजाइश बनती है।

नाकरा ने कहा, ‘खेती की पूरी वैल्यू चेन में मशीनीकरण अभी भी 40 प्रतिशत से कम है।’ उन्होंने कहा कि भविष्य में विकास हार्वेस्टर, बेलर और सीड ड्रिल जैसी ज्यादा कीमत वाली श्रेणी से आएगा। खेती की वैल्यू चेन के ज्यादातर हिस्सों में मशीनीकरण का स्तर कम है, जिससे जमीन तैयार करने वाले पारंपरिक उपकरणों के अलावा विकास की काफी गुंजाइश है।

एमऐंडएम अपनी मशीनीकरण रणनीति के तहत टेलीमैटिक्स की सुविधा भी दे रही है। यह टेक्नॉलजी मशीन खरीदारों को डिजिटल रूप से यह ट्रैक करने में मदद करती है कि कितना एरिया कवर किया गया, कितने घंटे काम हुआ और कितना तेल खर्च हुआ। साथ ही, यह ट्रैक्टर मालिकों को उपकरण के इस्तेमाल और प्रोसेसर पर नजर रखने में भी मदद करती है।

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First Published - June 8, 2026 | 12:05 AM IST

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