सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी रियल एस्टेट संपत्तियों से मिलने वाले यील्ड या रिटर्न को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित रही है। इसके साथ ही बीमा कंपनी 60,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अपनी विशाल संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए अलग सब्सिडियरी कंपनी बनाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।
LIC के सीईओ एवं एमडी आर. दुरईस्वामी ने कहा, ”हमारे पास काफी रियल एस्टेट संपत्तियां हैं, जिनमें कुछ विरासत में मिली हैं और कुछ पिछले 70 वर्षों में खरीदी गई हैं। इनका उपयोग अपने कामकाज के साथ निवेश के रूप में भी किया जाता है, जिससे हमें आय होती है।” उन्होंने कहा कि LIC प्रत्येक संपत्ति को निवेश के रूप में देखती है और उम्मीद करती है कि हर संपत्ति पॉलिसीधारकों और शेयरधारकों के लिए बेहतर यील्ड में योगदान दे।
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दुरईस्वामी ने कहा कि हाल के समय में LIC ने अपने रियल एस्टेट पोर्टफोलियो की व्यापक समीक्षा शुरू की है, ताकि उससे मिलने वाले रिटर्न और आय का आकलन किया जा सके तथा सुधार की संभावनाएं तलाशी जा सकें। उन्होंने कहा कि इस विस्तृत समीक्षा का उद्देश्य पॉलिसीधारकों के लिए बेहतर यील्ड सुनिश्चित करने के साथ कंपनी की कुल लाभप्रदता को मजबूत करना है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए किसी लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कोई निश्चित लक्ष्य तय नहीं किया गया है, लेकिन मौजूदा स्थिति से बेहतर प्रदर्शन करने पर जोर है। उन्होंने कहा, ”स्व-उपयोग वाली संपत्तियां भी संगठन की छवि मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए हमारी शाखाओं और स्वामित्व वाली इमारतों के माहौल और सुविधाओं को बेहतर बनाना प्रमुख प्राथमिकता बन गया है।”
दुरईस्वामी ने कहा कि LIC किराये पर दी गई संपत्तियों की भी समीक्षा कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनसे उचित राजस्व प्राप्त हो। रियल एस्टेट कारोबार के अधिक प्रभावी प्रबंधन के लिए अलग सब्सिडियरी कंपनी बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा, ”हमारे सामने सभी विकल्प खुले हैं… सभी विकल्पों की समीक्षा की जाएगी और आने वाले समय में आगे कदम उठाए जाएंगे।”
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केंद्र सरकार द्वारा LIC में हिस्सेदारी और घटाने की तैयारी के सवाल पर उन्होंने कहा, ”हम पहले दिन से इसके लिए तैयार हैं। जब हमने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की तैयारी शुरू की थी, तभी से भविष्य की ऐसी कार्रवाइयों के लिए भी तैयार थे। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार को लेना है।” उन्होंने कहा कि जैसे ही हिस्सेदारी बिक्री के समय और मात्रा पर निर्णय होगा, LIC सरकार के साथ मिलकर इसे सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी।
LIC 2022 में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लेकर आई थी, जो उस समय आकार के लिहाज से देश का सबसे बड़ा आईपीओ था। सरकार ने इसमें 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
(PTI इनपुट के साथ)