मंदी को देखते हुए हैदराबाद स्थित लैंको ग्रुप की कंपनी लैंको इन्फ्राटेक लिमिटेड (एलआईएल) ने नई रणनीति तैयार की है।
कंपनी का कहना है कि वह अब ऊर्जा उत्पादन पर ही ध्यान केंद्रित करेगी, जबकि निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी डेवलपमेंट कारोबार को थोड़ा धीमा करेगी। कंपनी ने पहले ही विंड टरबाइन निर्माण सुविधा के विकास की योजना को टाल दिया है।
गौरतलब है कि कंपनी इसी माह 2 मेगावाट क्षमता वाले विंड टरबाइन शुरू करने की योजना बना रही थी। वित्त वर्ष 2007-08 के दौरान कंपनी ने 1,605.70 करोड़ रुपये का कारोबार किया था, जबकि उसका मुनाफा 354.10 करोड़ रुपये था।
लैंको ग्रुप के चेयरमैन एल. मधुसूदन राव ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि कंपनी ऊर्जा उत्पादन पर ही मुख्य ध्यान देगी। कंपनी का मानना है कि मंदी का इस कारोबार पर खास असर नहीं पड़ा है। राव के मुताबिक, एलआईएल 2015 तक अपने ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। कंपनी ने 15,000 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने बताया कि अगले दो महीनों में 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू किया जा सकता है। राव का कहना है कि कंपनी अभी 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रही है और 2000 मेगावाट की क्षमता बढ़ने से निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में यह शुमार हो सकती है। चालू वित्त वर्ष में एलआईएल 2,640 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
राव ने बताया कि पंजाब के राजपुर में प्रस्तावित 1,320 मेगावाट क्षमता वाले संयंत्र और महाराष्ट्र में 1,600 मेगावट वाले संयंत्र के लिए कंपनी सबसे कम बोली लगाई है। ऐसे में इन संयंत्रों को स्थापित करने का काम भी कंपनी को मिल सकता है। राव के मुताबिक, इन परियोजनाओं के निर्माण से कंपनी को करीब 12,000 करोड़ रुपये का निर्माण का ठेका मिल सकता है।
हालांकि राव ने बताया कि मंदी के चलते कंपनी ने रियल्टी परियोजनाओं को फिलहाल टालने का मन बनाया है। हैदराबाद में प्र्रस्तावित लैंको हिल्स परियोजना पर काम बाजार की स्थिति सुधरने के बाद ही शुरू किया जाएगा।
राव ने बताया कि कंपनी अपने कॉरपोरेट ऑफिस को जल्द ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना बना रही है। इसके पीछे कंपनी का तर्क यह है कि हमारा कारोबार मुख्य रूप से उत्तर भारत में होता है। यही वजह है कि बेहतर सुविधा के लिए कंपनी अपना कार्यालय शिफ्ट करने की योजना बना रही है।