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जामनगर बनेगा तेल का समंदर

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Last Updated- December 10, 2022 | 6:39 PM IST

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) और उसकी सहयोगी कंपनी रिलायंस पेट्रोलियम (आरपीएल) के मेल का रास्ता साफ हो गया है।
दोनों कंपनियों के निदेशक मंडलों ने विलय के प्रस्ताव को आज हरी झंडी दिखा दी। इसके साथ ही जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी बनना भी तय हो गया।
फिलहाल वेनेजुएला में पैरागुआना रिफाइनरी सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र है। इस विलय के जरिये जामनगर में कंपनी के पास कुल 12.4 लाख बैरल रोजाना की तेल शोधन क्षमता हो जाएगी।
दुनिया में विभिन्न रिफाइनिंग परिसरों में रोजाना जितने तेल का शोधन किया जाता है, यह आंकड़ा उसका एक चौथाई है। हालांकि इस प्रस्ताव को आखिरी मंजूरी बम्बई उच्च न्यायालय की ओर से मिलनी है।
दोनों कंपनियों की ओर से जारी बयानों में बताया गया कि आरपीएल के शेयरधारकों को 16:1 के अनुपात में आरआईएल के शेयर दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि आरपीएल के शेयरधारक को प्रत्येक 16 शेयरों के बदले आरआईएल का 1 इक्विटी शेयर दिया जाएगा।
आरआईएल आरपीएल के शेयरधारकों को कुल 6.92 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और विलय के बाद उसमें कुल 37 लाख शेयरधारक हो जाएंगे। आरआईएल की इक्विटी पूंजी भी बढ़कर 1,643 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी और उसमें प्रमोटरों की हिस्सेदारी 2 फीसदी घट जाएगी और केवल  47 फीसदी रह जाएगी।
आरआईएल के मुख्य वित्तीय अधिकारी आलोक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी इसके लिए नए ट्रेजरी स्टॉक नहीं बनाएगी। लेकिन मौजूदा 20 करोड़ ट्रेजरी स्टॉक का अस्तित्व कायम रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विलय होने के बाद आरआईएल को पहले से भी ज्यादा बड़ी परियोजनाएं हाथ में लेने का मौका मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि विलय में असली मसला कंपनी का आकार है और कारोबारी विविधता भी। उन्होंने बताया कि मांग कम होने के वक्त नए घटनाक्रम के जरिये आरआईएल को वैश्विक बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने का मौका मिलेगा।
अग्रवाल ने दावा किया कि इस विलय से दोनों कंपनियों पर कर के मामले में कोई भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विलय के बाद भी दोनों रिफाइनरियों को मिल रही कर रियायत जारी रहेगी और उसमें किसी भी तरह की कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है।
 इस विलय के साथ आरआईएल मुनाफे के मामले में दुनिया की 50 शीर्ष कंपनियों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगी। तेल शोधन करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में उसका नंबर अब 13वां हो जाएगा। वह अमेरिकी कंपनी शेव्रॉन को पीछे छोड़ देगी।
विलय योजना के अनुसार आरआईएल विलय से पहले आरपीएल में मौजूद शेव्रॉन के 5 फीसदी शेयर खरीद लेगी। शेव्रॉन से शेयर खरीद के लिए 60 रुपये प्रति शेयर का भाव मुकर्रर किया गया है।
शेव्रॉन ने इसी भाव पर अप्रैल 2006 में शेयर खरीदे थे। आरआईएल मानती है कि इस मेल से दोनों कंपनियों को परिचालन और वित्तीय तालमेल के मामले में फायदा होगा। इसके अलावा परिचालन लागत भी कम होगी। कंपनी ने यह भी कहा है कि शेव्रॉन के साथ उसके व्यावसायिक संबंध जारी रहेंगे।
रिफाइनरी बनेगी सबसे बड़ी
दोनों कंपनियों के निदेशक मंडल ने दे दी हरी झंडी
आरपीएल के 16 शेयरों के बदले आरआईएल का 1 शेयर
1 अप्रैल मुकर्रर  हुई है विलय की तारीख
पहले खरीदने होंगे शेव्रॉन से 5 फीसदी शेयर

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First Published - March 2, 2009 | 9:39 PM IST

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