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आईटी-बीपीओ को सताने लगी सुरक्षा की चिंता

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Last Updated- December 08, 2022 | 6:46 AM IST

देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में हुए आतंकी हमलों ने देश भर की आईटी-बीपीओ कंपनियों की नींद उड़ा दी है।


अगले 4-5 हफ्तों तक ज्यदातर कंपनियां अपने ग्राहकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुरक्षा हालात के  बारे में जानकारी दे रही हैं।

उदाहरण के लिए देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस टेक्नोलॉजिज ने देश भर में अपने परिसरों में सुरक्षा बढ़ा दी है।

इन्फोसिस के निदेशक (मानव संसाधन) और निदेशक मंडल के सदस्य टी वी मोहनदास पई ने बताया, ‘हमने कर्नाटक सरकार और पुलिस से सुरक्षा की मांग की है।  इसके अलावा हम निजी सुरक्षा एजेंसियों से भी बातचीत कर रहे हैं।’

उन्होंने बताया कि आतंक दुनिया के सभी देशों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है । बाकी देशों के लोग भी यह बात समझते हैं कि यह दुनिया के किसी भी देश में  हो सकता है। उन्होंने बताया, ‘हमें कारोबार में किसी भी तरह की कमी आने की संभावना नहीं लग रही है।

हमारे कुछ ग्राहकों ने सुरक्षा कारणों से भारत आने में असमर्थता जताई है। लेकिन काम के लिए हम उनसे मिलेंगे या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करेंगे।’ माना जा रहा है कि कुछ आईटी कंपनियों ने राज्य सरकारों से हथियारों से लैस जवानों की तैनाती की मांग की है।

देश की सबसे बड़ी बीपीओ कंपनी जैनपेक्ट ने देश भर में अपने परिसर और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा इंतजाम और पुख्ता कर रही है।

जैनपेक्ट के अंतरराष्ट्रीय प्रमुख (इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स) शेखर ने कर्मचारियों के नाम संदेश में लिखा है, ‘कृपया हर समय अपना पहचान पत्र अपने पास रखे।

इसके अलावा सभी लैपटॉप, बैग्स और परिसर में आने-जाने वाले सभी वाहनों की पूरी तरह जांच की जाएगी।’ कंपनी ने स्थानीय पुलिस से भी सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है।

मुंबई स्थित एक अंतरराष्ट्रीय बीपीओ कंपनी में काम करने वाले एक कर्मचारी ने कहा, ‘हमें प्रबंधन की तरफ से जांच में सहयोग करने का निर्देश मिला था। सभी कर्मचारियों के  सामान की जांच के अलावा मुझे सुरक्षा में और कोई बदलाव नहीं दिखा है।

लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। अगर भविष्य में आतंकी फिर से हमला करते हैं, तो कं पनी के सुरक्षा गार्ड अपनी लाठियों से उनका सामना कैसे कर पाएंगे।’ इस बात से माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारी भी सहमत हैं।

कंपनी के एक कर्मचारी ने बताया कि परिसर में आने-जाने वाली गाड़ियों की जांच तो की जा रही है।

माइक्रोसॉफ्ट के लिए इस इमारत को बनाने वाली कंपनी डीएलएफ ने परिसर के लिए सुरक्षा मुहैया कराई है, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट को अपने सुरक्षा तंत्र पर ज्यादा भरोसा है।

यूरोप की एक अग्रणी बीपीओ कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि अगर भारत एक देश के रूप में इन सभी चीजों को लेकर कड़ा विरोध जाहिर नहीं करेगा, तो ऐसे में कंपनियों की बात कौन सुनेगा।

उन्होंने कहा, ‘जहां तक आंतरिक सुरक्षा की बात है तो सुरक्षा इंतजाम पहले से बेहतर हो जाएंगे। इसके तहत कर्मियों के बैकग्राउंड की छानबीनभी शुरू होगी।

इसके अलावा कई कंपनियां इस तरह के हालात से निपटने के लिए पहले से ही तैयार रहने की कोशिश करेंगी।’


नैस्कॉम के चेयरमैन और जेनसार के प्रबंध निदेशक गणेश नटराजन ने कहा, ‘इसका असर कारोबार पर जरूर पड़ेगा। क्योंकि सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल पूछे जाएंगे।

कंपनियां जितने भी सुरक्षा इंतजाम करें वह कम ही रहेंगे। इस मामले में सरकार को ही समस्या का समाधान निकालना होगा।’

मुंबई हमलों और  कारोबार के बारे में 247 बीपीओ के सह संस्थापक एस नागराजन ने बताया, ‘छोटी अवधि में कारोबार के लिए इस तरह के आतंकी हमलों का असर जरूर पड़ता है।

कारगिल युद्ध के दौरान भी इस क्षेत्र में होने वाले क रारों की संख्या में कमी आई थी। मुझे लगता है मुंबई में हुए इन आतंकी हमलों के कारण ग्राहक होने वाले समझौतों के बारे में फिर से सोचेंगे।’

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First Published - December 2, 2008 | 11:19 PM IST

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