ओनएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) ने फारस की खाड़ी में जो फरजाद-बी गैस क्षेत्र ढूंढा था, वह भारत के हाथ से निकल गया है। ईरान ने इस विशाल गैस क्षेत्र के विकास का ठेका एक स्थानीय कंपनी को दे दिया है।
ईरान की समाचार एजेंसी शना ने ईरान के तेल मंत्रालय के अधिकारी के हवाले से खबर दी है, ‘नैशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (एनआईओसी) ने पेट्रोपार्स ग्रुप के साथ 1.78 अरब डॉलर का एक समझौता किया है, जो फारस की खाड़ी में स्थित फरजाद गैस क्षेत्र को विकसित करने के लिए है।’ ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजान जांगेनेह की उपस्थिति में तेहरान में आज ही इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस क्षेत्र में 23 लाख करोड़ घन फुट गैस का भंडार है, जिसमें से 60 प्रतिशत गैस निकाली जा सकती है। समाचार एजेंसी के अनुसार पुनर्खरीद समझौते में अगले पांच साल तक रोजाना 2.8 करोड़ घनमीटर गैस का उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है।
सरकारी कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) की विदेश में निवेश करने वाली इकाई ओवीएल ने 2008 में समुद्र तट से दूर फारसी उत्खनन क्षेत्र में विशाल गैस क्षेत्र की खोज की थी, जिसे फरजाद-बी नाम दिया गया। ओवीएल और उसके साझेदारों ने इसे विकसित करने के लिए 11 अरब डॉलर निवेश करने का प्रस्ताव भी रखा था। पिछले साल 18 अक्टूबर को पीटीआई ने खबर दी थी कि ईरान की सरकारी कंपनी एनआईओसी ओवीएल को काफी पहले इत्तिला कर चुकी थी कि फरजाद-बी के विकास का समझौता किसी ईरानी कंपनी से किया जाएगा।