भारत और ईरान के बीच विशेष समझौते के तहत तेल और गैस टैंकरों का भारत की ओर आवागमन शुरू होने के बाद बंदरगाह पर कंटेनरों की भीड़ लग गई है। इन टर्मिनलों पर बढ़ती भीड़ से निर्यातक परेशान हैं। सप्ताहांत में, भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक, शिवालिक और नंदा देवी, लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं और सोमवार व मंगलवार को भारत पहुंचने वाले हैं।
माल ढुलाई उद्योग के अधिकारी ने कहा, “तेल टैंकरों और एलपीजी जहाजों को तो गुजरने की अनुमति दे दी गई है, लेकिन हम अधिकारियों से कंटेनरों की आवाजाही सुनिश्चित करने का अनुरोध कर रहे हैं।’
उन्होंने बताया कि न्हावा शेवा/जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) और कांडला बंदरगाह (दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण) जैसे बंदरगाहों पर भीड़भाड़ की समस्या बनी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न स्तरों पर 30,000 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं। ओस्लो स्थित शिपिंग इंटेलिजेंस फर्म ज़ेनेटा के अनुसार कांडला बंदरगाह पर भीड़भाड़ 100 प्रतिशत है और फर्म के पोर्ट कंजेशन ट्रैकर द्वारा इसे गंभीर स्थिति में चिह्नित किया गया है। बंदरगाह पर वर्तमान में औसत प्रतीक्षा समय 2.1 दिन है।