उद्योग

शराब के शौकीनों के लिए खुशखबरी! भारत-ईयू समझौते के बाद 150% से घटकर आधा होगा आयात शुल्क

शुरूआती जानकारी से संकेत मिलता है कि यूरोपीय संघ से आने वाली सभी स्पिरिट और वाइन पर आयात शुल्क मौजूदा 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया जाएगा

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अक्षरा श्रीवास्तव   
शार्लीन डिसूजा   
Last Updated- January 27, 2026 | 10:34 PM IST

भारत और यूरोपीय संघ  के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से एल्कोहलिक बेवरिजेज (एल्को-बेव) सेक्टर पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। कंपनियां समझौते के ब्योरे का इंतजार कर रही हैं। वहीं उद्योग से जुड़े संगठनों ने समझौते का स्वागत किया है।

इंटरनैशनल स्पिरिट्स ऐंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) के मुख्य कार्याधिकारी संजित पाधी ने कहा, ‘भारत-यूरोपीय संघ एफटीए एल्कोबेव सेक्टर के लिए महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। इस समझौते से न केवल भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार संबंध गहरे होंगे, बल्कि इससे उद्योग में मजबूत सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को भी बढ़ावा मिलेगा। यह निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार के प्रति साझा प्रतिबद्धता बताता है। इससे दोनों पक्षों के सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।’

अभी समझौते के विस्तृत प्रावधानों का इंतजार है। लेकिन शुरूआती जानकारी से संकेत मिलता है कि यूरोपीय संघ से आने वाली सभी स्पिरिट और वाइन पर आयात शुल्क मौजूदा 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया जाएगा। समझौते में कहा गया है कि आगे चलकर चरणबद्ध तरीके से स्पिरिट्स पर शुल्क घटाकर 40 प्रतिशत और वाइन पर 20 फीसदी करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।  पाधी ने कहा, ‘कुल मिलाकर इन कदमों से भारत-ईयू एफटीए से दोनों बाजारों को उल्लेखनीय रणनीतिक लाभ  मिलेगा। 

भारत के उन उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा, जो प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय ब्रॉन्डों के कद्रदान हैं।’ उद्योग के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह समझौता कॉग्नेक, ब्रांडी और वाइन के कारोबारियों के लिए फायदेमंद है। व्हिस्की देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली स्पिरिट बनी हुई है, लेकिन इस कदम से ब्रांडी बनाने वाले ब्रांडों को देश में अच्छी शुरुआत करने में मदद मिलेगी क्योंकि लोगों के लिए विकल्प उपलब्ध होंगे।

इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल राजेश चोपड़ा ने कहा, ‘भारत यूरोपीय संघ व्यापार समझौता भारत के शराब उद्योग के लिए कम अवधि के फायदे के बजाय ढांचागत बदलाव है। कम और पहले से मालूम शुल्क के कारण भारत के सिंगल माल्ट और प्रीमियम स्पिरिट को यूरोप में बाजार मिलेगा। इससे उत्पादों को कीमत युद्ध के बजाय गुणवत्ता, परिपक्वता के मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी।’

First Published : January 27, 2026 | 10:31 PM IST