प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को 3 महीने तक लगे 50 प्रतिशत अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क के झटके के बाद अब नया जीवन मिला है। उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में अमेरिका को इन वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि दर 2 अंकों में पहुंच सकती है।
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सिटी) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में अमेरिका को भारत से आयात में क्रमशः 5 प्रतिशत, 30.1 प्रतिशत और 31.4 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि जनवरी से नवंबर तक भारत से आयात में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इससे टेक्सटाइल और अपैरल क्षेत्र में 2030 तक 100 अरब डॉलर का निर्यात हासिल करने के भारत के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 25 में 37.7 अरब डॉलर था। भारत को बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 2 प्रतिशत का लाभ भी होगा, जिन पर 20 प्रतिशत कर लगा हुआ है। भारत पर अमेरिका ने 18 प्रतिशत कर लगाया है।
अमेरिका के 80 अरब डॉलर के अपैरल आयात बाजार में पिछले 2 साल में भारत की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से बढ़कर करीब 7 प्रतिशत हो गई है। लेकिन नवंबर में इसमें गिरावट आई।
इंडियन टेक्सप्रेन्योर्स फेडरेशन (आईटीएफ) के संयोजक प्रभु दामोदरन ने कहा, ‘नए व्यापार समझौते से भारत को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लाभ मिलने के कारण उद्योग को 6-7 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी जल्द मिल जाने की उम्मीद है। साथ ही आगामी वित्त वर्ष में अमेरिका को होने वाले निर्यात में 2 अंक की वृद्धि दर का भरोसा है।’
उद्योग के सामान्य नियम के अनुसार 1 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी लगभग 7,000 करोड़ रुपये के निर्यात के बराबर होती है।
वित्त वर्ष 2026-27 से इस क्षेत्र में अपैरल और होम टेक्सटाइल निर्यात में मासिक आधार पर दोहरे अंकों की वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे मासिक अपैरल निर्यात मौजूदा 1.27 अरब डॉलर से बढ़कर 1.5 से 1.6 अरब डॉलर हो जाएगी। वित्त वर्ष 2025 में भारत के कुल टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात का करीब 28 प्रतिशत अमेरिका भेजा गया था।
सीआईटीआई के चेयरमैन अश्वन चंद्रन ने कहा, ‘इस अत्यंत सकारात्मक प्रगति से 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात के भारत के लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा और इस उद्योग में नौकरियों का सृजन होगा।