facebookmetapixel
Advertisement
कॉल और डेटा के बाद अब AI टोकन से कमाई की तैयारी में जियोसिर्फ 30 दिन का LPG स्टॉक बचा, खाड़ी में फंसे जहाजों से भारत में गैस संकट का डरगैस संकट गहराया: कतर से LNG बंद, CNG महंगी होने का खतराअब नहीं जाना पड़ेगा अलग वेबसाइट पर, इन बैंक ऐप्स से ही मिलेगी पूरी CIBIL रिपोर्टपाकिस्तान में भड़के प्रदर्शन, अमेरिका ने कराची-लाहौर से स्टाफ हटाने का दिया आदेशBusiness Loan Insurance क्यों है जरूरी? कहीं आपकी एक चूक परिवार और संपत्ति को संकट में न डाल दे!SIP Investment: ₹10,000 की मंथली एसआईपी से कितना बनेगा पैसा? 5 से 15 साल तक की पूरी कैलकुलेशन देखेंSugar Stocks: क्या आने वाली है एथेनॉल कीमतों में बढ़ोतरी? शुगर शेयरों ने लगाई दौड़दुनिया के केंद्रीय बैंक अचानक क्यों धीमे पड़ गए? जनवरी में सोना खरीद सिर्फ 5 टनखामेनेई के बाद कौन? बेटे मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारी

स्टील सेक्टर के लिए बड़ी खबर: सरकार जल्द अनिवार्य करेगी कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग, जानें क्या है तैयारी?

Advertisement

स्टील मंत्रालय स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग अनिवार्य करेगा, जिससे उत्सर्जन सीमा का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को क्रेडिट खरीदना होगा

Last Updated- March 03, 2026 | 10:06 PM IST
Steel
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार स्टील क्षेत्र के लिए कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) के तहत अनुपालन अनिवार्य करने की तैयारी में है। स्टील मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसे जल्द ही लागू किए जाने की संभावना है।  यह कदम स्वच्छ तकनीक अपनाने और डीकार्बनाइजेशन को बढ़ावा देने के एक बड़े अभियान का हिस्सा है।

पहचान सार्वजनिक न किए जाने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘हम बहुत जल्द सीसीटीएस शुरू करने जा रहे हैं। मैं कोई तारीख नहीं दे सकता। मैं इसे स्टील सेक्टर के लिए अनिवार्य करने की बात कर रहा हूं।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने उत्सर्जन के वर्तमान स्तरों का आकलन करने के लिए लगभग 70 स्टील इकाइयों में शुरुआती सर्वे किया है। बहरहाल शुरुआती सर्वे में अधिकारियों को कुछ खामियां मिलीं और आंकड़ों के कुछ हिस्सों की फिर से जांच की जा रही है। 

ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के तहत सीसीटीएस को पेश किया गया था, जिसमें भारत में एक घरेलू कार्बन बाजार की स्थापना का प्रावधान है। सरकार ने 2023 में योजना का ढांचा अधिसूचित किया था। 

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग बाजार पर आधारित व्यवस्था है। इसमें कंपनियां क्रेडिट खरीदती और बेचती हैं और उन्हें एक खास मात्रा में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की अनुमति मिलती है। 

एक क्रेडिट आमतौर पर कार्बन डाइऑक्साइड के एक टन को हटाने या उससे बचने के बराबर होता है। जो कंपनियां अपनी अनुमति प्राप्त सीमा से कम उत्सर्जन करती हैं, वे अधिशेष क्रेडिट बेच सकती हैं, जबकि सीमा से अधिक उत्सर्जन करने वाली कंपनियों को क्रेडिट खरीदना होगा, जिससे उत्सर्जन को कम करने को प्रोत्साहन मिलेगा। 

Advertisement
First Published - March 3, 2026 | 10:06 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement