सरकार स्टील क्षेत्र के लिए कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (सीसीटीएस) के तहत अनुपालन अनिवार्य करने की तैयारी में है। स्टील मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसे जल्द ही लागू किए जाने की संभावना है। यह कदम स्वच्छ तकनीक अपनाने और डीकार्बनाइजेशन को बढ़ावा देने के एक बड़े अभियान का हिस्सा है।
पहचान सार्वजनिक न किए जाने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘हम बहुत जल्द सीसीटीएस शुरू करने जा रहे हैं। मैं कोई तारीख नहीं दे सकता। मैं इसे स्टील सेक्टर के लिए अनिवार्य करने की बात कर रहा हूं।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने उत्सर्जन के वर्तमान स्तरों का आकलन करने के लिए लगभग 70 स्टील इकाइयों में शुरुआती सर्वे किया है। बहरहाल शुरुआती सर्वे में अधिकारियों को कुछ खामियां मिलीं और आंकड़ों के कुछ हिस्सों की फिर से जांच की जा रही है।
ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के तहत सीसीटीएस को पेश किया गया था, जिसमें भारत में एक घरेलू कार्बन बाजार की स्थापना का प्रावधान है। सरकार ने 2023 में योजना का ढांचा अधिसूचित किया था।
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग बाजार पर आधारित व्यवस्था है। इसमें कंपनियां क्रेडिट खरीदती और बेचती हैं और उन्हें एक खास मात्रा में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की अनुमति मिलती है।
एक क्रेडिट आमतौर पर कार्बन डाइऑक्साइड के एक टन को हटाने या उससे बचने के बराबर होता है। जो कंपनियां अपनी अनुमति प्राप्त सीमा से कम उत्सर्जन करती हैं, वे अधिशेष क्रेडिट बेच सकती हैं, जबकि सीमा से अधिक उत्सर्जन करने वाली कंपनियों को क्रेडिट खरीदना होगा, जिससे उत्सर्जन को कम करने को प्रोत्साहन मिलेगा।