राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने आज कहा कि सीमा शुल्क में आगे के सुधार भागीदारों के ज्यादा भरोसे और उन्नत तकनीकी के बल पर होने चाहिए क्योंकि भारत की व्यापार व्यवस्था पहले से अधिक पेचीदा तथा डिजिटल होती जा रही है। उन्होंने यहां सीमा शुल्क सुधारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में कहा कि भारत के व्यापार की मात्रा बढ़ती जा रही है और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में उसकी पैठ भी गहरी हो रही है। इस कारण आर्थिक यात्रा के इस अहम मोड़ पर गवर्नेंस की नई मांग सामने आ रही है।
श्रीवास्तव ने कहा, ‘इस कायाकल्प में सीमा शुल्क प्रशासन की खास जगह है। यह नियामकीय अधिकरण भर नहीं है बल्कि ऐसी संस्था है, जो आर्थिक वृद्धि को बल देती है, आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती लाती है, समाज की रक्षा करती है और दुनिया भर में होड़ करने की भारत की क्षमता बढ़ाती है।’
उन्होंने कहा कि हाल के केंद्रीय बजट में घोषित सुधार स्पष्ट और सतत नीतिगत दिशा दिखाते हैं। इसमें दो मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया गया है – साझेदारों पर भरोसा और तकनीकी का प्रभावी इस्तेमाल। उन्होंने कहा, ‘हमारे सामने चुनौती यह है कि यह भरोसा उद्योग को जमीनी स्तर पर महसूस कैसे कराया जाए और तकनीकी असरदार मददगार कैसे बने।’
कर विभाग ने एक अहम कदम उठाते हुए नियमों का मसौदा सार्वजनिक कर दिया है, जिस पर भागीदार अपनी राय दे सकते हैं। श्रीवास्तव के मुताबिक इस कदम से पता चलता है कि विभाग को कितना बौद्धिक भरोसा है और उद्योग के सुझावों को वह कितने खुले मन से शामिल करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि आज व्यापार की प्रक्रियाओं में सीमा शुल्क, नियामकीय संस्थाएं, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, निर्यातक और आयातक शामिल हैं। इसीलिए सुधारों में सरकार के सभी पक्षों और सभी भागीदारों को साथ लेने की जरूरत है।