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व्यापार बढ़ा तो कस्टम्स भी बदलेगा- राजस्व सचिव का संकेत

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अरविंद श्रीवास्तव बोले- व्यापार व्यवस्था ज्यादा डिजिटल और जटिल हो रही; सुधारों में सभी भागीदारों को साथ लेना जरूरी

Last Updated- February 27, 2026 | 9:02 AM IST
Efforts to rationalize customs duty

राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने आज कहा कि सीमा शुल्क में आगे के सुधार भागीदारों के ज्यादा भरोसे और उन्नत तकनीकी के बल पर होने चाहिए क्योंकि भारत की व्यापार व्यवस्था पहले से अधिक पेचीदा तथा डिजिटल होती जा रही है। उन्होंने यहां सीमा शुल्क सुधारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में कहा कि भारत के व्यापार की मात्रा बढ़ती जा रही है और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में उसकी पैठ भी गहरी हो रही है। इस कारण आर्थिक यात्रा के इस अहम मोड़ पर गवर्नेंस की नई मांग सामने आ रही है।

श्रीवास्तव ने कहा, ‘इस कायाकल्प में सीमा शुल्क प्रशासन की खास जगह है। यह नियामकीय अधिकरण भर नहीं है बल्कि ऐसी संस्था है, जो आर्थिक वृद्धि को बल देती है, आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती लाती है, समाज की रक्षा करती है और दुनिया भर में होड़ करने की भारत की क्षमता बढ़ाती है।’

उन्होंने कहा कि हाल के केंद्रीय बजट में घोषित सुधार स्पष्ट और सतत नीतिगत दिशा दिखाते हैं। इसमें दो मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया गया है – साझेदारों पर भरोसा और तकनीकी का प्रभावी इस्तेमाल। उन्होंने कहा, ‘हमारे सामने चुनौती यह है कि यह भरोसा उद्योग को जमीनी स्तर पर महसूस कैसे कराया जाए और तकनीकी असरदार मददगार कैसे बने।’

कर विभाग ने एक अहम कदम उठाते हुए नियमों का मसौदा सार्वजनिक कर दिया है, जिस पर भागीदार अपनी राय दे सकते हैं। श्रीवास्तव के मुताबिक इस कदम से पता चलता है कि विभाग को कितना बौद्धिक भरोसा है और उद्योग के सुझावों को वह कितने खुले मन से शामिल करने को तैयार है।

उन्होंने कहा कि आज व्यापार की प्रक्रियाओं में सीमा शुल्क, नियामकीय संस्थाएं, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, निर्यातक और आयातक शामिल हैं। इसीलिए सुधारों में सरकार के सभी पक्षों और सभी भागीदारों को साथ लेने की जरूरत है।

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First Published - February 27, 2026 | 9:02 AM IST

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