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ऊर्जा संकट के बीच कोल इंडिया का बड़ा एक्शन प्लान

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ऊर्जा आपूर्ति पर संकट की आशंका के बीच कोल इंडिया ने कोयले की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम तेज किए हैं

Last Updated- March 20, 2026 | 8:39 AM IST
Coal India
Representational Image

पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण देश भर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने सभी उपभोक्ताओं, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं। सरकार बदलती मांग की परिस्थितियों के बीच ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने पर काम कर रही है।

इसी रणनीति के तहत कंपनी ने मार्च 2026 में 29 ई-नीलामी करने की योजना बनाई है जिसमें करीब 2.35 करोड़ टन कोयला उपलब्ध कराया जाएगा। 12 मार्च के बाद हुई पांच नीलामियों में 73.1 लाख टन में से 31.96 लाख टन कोयला बुक हुआ जिससे बाजार में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता के संकेत मिलते हैं।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अपनी पहले की रिपोर्ट में यह बताया था कि कैसे दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के छोटे उपभोक्ता, जैसे कैटरिंग और रेस्तरां कारोबार से जुड़े लोग रसोई गैस (एलपीजी) की कमी के कारण कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन के साथ काम चला रहे हैं। अनौपचारिक बाजार में कोयले की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा देने वाली सीआईएल, राज्य नामित एजेंसियों (एसएनए) के माध्यम से छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं को कोयला उपलब्ध करा रही है। कंपनी ने राज्यों से अतिरिक्त जरूरतों की जानकारी देने को कहा है ताकि किसी संभावित कमी से बचा जा सके। साथ ही, राज्यों द्वारा कोयले की खपत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि बिना किसी बाधा के आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

यह आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब देश में कोयले का भंडार पर्याप्त है। 18 मार्च 2026 तक सीआईएल की खदानों में 12.55 करोड़ टन कोयला मौजूद था, जो 1 अप्रैल 2025 के 10.67 करोड़ टन से अधिक है। इसके अलावा, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के पास 57.5 लाख टन, घरेलू और वाणिज्यिक खदानों में 1.57 करोड़  टन, ट्रांजिट में 1.2 करोड़ टन और बंदरगाहों आदि पर 54 लाख टन कोयला उपलब्ध है। थर्मल ऊर्जा संयंत्रों में भी कोयले का भंडार मजबूत स्थिति में है। यहां 5.34 करोड़ टन कोयला मौजूद है, जो मौजूदा खपत के अनुसार लगभग 23 दिनों के लिए पर्याप्त है।

सरकार का कहना है कि कोयला उत्पादन मांग के अनुसार जारी है जिससे इस्पात और सीमेंट जैसे प्रमुख क्षेत्रों को स्थिर आपूर्ति मिल रही है, साथ ही देश में अक्षय ऊर्जा क्षमता का विस्तार भी हो रहा है। कोयला मंत्रालय ने नीति समर्थन, निगरानी और सभी हितधारकों के सहयोग से स्थिर आपूर्ति बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

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First Published - March 20, 2026 | 8:39 AM IST

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