परमाणु ऊर्जा उत्पादन करने वाली कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन दिसंबर 2008 के अंत तक 2,000 टन यूरेनियम खरीदने की योजना बना रही है।
यह कदम ईंधन की आपूर्ति को दुरुस्त करने के लिए उठाया जा रहा है। कंपनी के अध्यक्ष श्रेयांस कुमार जैन ने कहा कि कंपनी लंबी अवधि के करार के लिए कई कंपनियों से बातचीत कर रही है। इस योजना के तहत चार विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने की भी बात की जा रही है, जिसमें 100 डॉलर के निवेश की संभावना है।
भारत के घरों और उद्योगों में बिजली की किल्लत 17 फीसदी तक हो जाती है। इसी संकट से निजात पाने के लिए भारत पहली बार परमाणु ऊर्जा रिएक्टर और यूरेनियम की खरीदारी की योजना बना रहा है। भारत-अमेरिका के बीच हुए परमाणु करार से तीन दशक बाद भारत के लिए परमाणु ऊर्जा संबंधी बाजार के तमाम रास्ते खुल गए हैं।
भारत को 2020 तक 40,000 मेगावाट बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए 28 रिएक्टरों के लिए यूरेनियम की अधिक से अधिक आवश्यकता है। जैन ने कहा, ‘आगामी और योजनाबद्ध परियोजना के लिए ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना हीं प्राथमिक लक्ष्य है। इसके लिए हमें लंबी अवधि की आपूर्ति की जरूरत है। इसके लिए हमलोग परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी खरीदने की योजना भी बना रहे हैं।’
अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 8 अक्टूबर को न्यायिक मंजूरी के बाद अमेरिकी कंपनियों जैसे जेनरल इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन के साथ एक करार किया, जिसके तहत परमाणु ईंधन और तकनीक भारत को बेची जा सके। परमाणु आपूर्ति करने वाले 45 देशों के समूह ने पिछले महीने भारत पर से सारे अंतरराष्ट्रीय पाबंदी हटाने का एलान किया था।
जैन ने कहा कि भारत ने इस बाबत कनाडा, कजाकिस्तान, अफ्रीका और रुस संघ के देशों से लंबी अवधि की आपूर्ति कांट्रैक्ट के लिए हाथ बढ़ाया है। कंपनी यूरेनियम खदानों में खुदाई और हिस्सेदारी खरीदने के लिए संयुक्त उपक्रम लगाने की योजना पर भी विचार कर रही है, जिसे अब तक फंड की कमी की वजह से अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।
दुनिया की सबसे बड़ी यूरेनियम आपूर्ति करने वाली कनाडा की कंपनी केमेको कॉर्पोरेशन ने कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत को यूरेनियम बेचने की सहमति जताई है। केमेको के प्रवक्ता लिले क्रान ने कहा, ‘परमाणु आपूर्ति करने वाले देशों ने भारत पर से प्रतिबंध हटाकर एक बड़े बाजार को खोल दिया है। हम भी इस बड़े बाजार तक अपनी पहुंच बनाने की दिशा में उत्सुक हैं।’
जैन ने कहा कि परमाणु आपूर्ति को लेकर आस्ट्रेलिया से बात करना अभी बाकी है। आस्ट्रेलिया ने 11 सितंबर को यह कहा था कि जो देश परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नही करेगा, वह उसे यूरेनियम नही बेचेगा।
भारत सरकार परमाणु आपूर्ति करने वाली कंपनियों जैसे फ्रांस की अरेवा एसए, अमेरिका की जेनरल इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन और वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन आदि से न्यूक्लियर रिएक्टर खरीदने के लिए 14 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है।