क्लिनिकल परीक्षण के लिए भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है। हाल यह है कि कई बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां देश में अपनी दवाओं के परीक्षण के लिए मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही हैं।
रॉश, फाइजर और एस्ट्रा जेनेका जैसी दुनिया भर की कम से कम एक दर्जन दवा कंपनियों को भारत में दवाओं के परीक्षण के लिए भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) की अनुमति मिल चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, यह अनमुति मिलने के बाद दवा निर्माता कंपनियां इस महीने 50 से अधिक क्लिनिकल परीक्षण करेंगी।
2005 में डीसीजीआई को ऐसे परीक्षणों के लिए करीब 100 आवेदन मिले। 2006 में 170 और 2007 में 200 आवेदन मंजूरी को आए। 2008 में तो डीसीजीआई के पास 350 से अधिक आवेदन आए।
एक जानकार सी एम गुलाटी के मुताबिक, भारत में ऐसे परीक्षणों की बढ़ती तादाद का मतलब अमेरिका में ऐसे परीक्षणों का घटना है। उनका कहना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत का रुख करने की वजह कम खर्च में अनुसंधान पूरा हो जाना है।
नावेर्टिस इंडिया के प्रबंध निदेशक रंजीत साहनी ने बताया, ‘दवा अनुसंधान की प्रक्रिया में क्लिनिकल परीक्षण काफी महत्वपूर्ण होता है। गुणवत्ता और नैतिकता की दृष्टि से ऐसे परीक्षण काफी महत्वपूर्ण होते हैं।’