हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने मंगलवार को चेतावनी दी कि वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान और भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण कच्चे माल की कीमतों में तीव्र वृद्धि हुई है। इसका हेलमेट निर्माताओं पर दबाव पड़ रहा है। साथ ही उसने इस बात पर भी चिंता जताई कि लागत कटौती के उपायों से कीमत संवेदी और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में सुरक्षा मानकों से समझौता किया जा सकता है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर मिलकर सैन्य हमले किए, जिससे खाड़ी क्षेत्र में नया संघर्ष छिड़ गया। इसके बाद पश्चिम एशियाई हवाई क्षेत्र के बड़े हिस्से और प्रमुख जहाज मार्गों को बंद कर दिया गया या उनमें भारी प्रतिबंध लग गए। इस वजह से दुनिया के सबसे व्यस्त यातायात गलियारों में से एक में विमानन और व्यापार में बाधा पड़ गई। उद्योग निकाय ने एक बयान में कहा कि भारत का हेलमेट बाजार अनुमानित तौर पर करीब 2 अरब डॉलर का है और लागत दबाव का सामना कर रहा है।
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एसोसिएशन के अनुसार, हाल के महीनों में प्रमुख सामग्रियों की कीमतों में भारी वृद्धि देखी गई है, जिसमें हेलमेट में इस्तेमाल होने वाली मुख्य सामग्री, विस्तारित पॉलिस्टिरीन (ईपीएस) की कीमत में करीब 74 फीसदी का इजाफा हुआ है। बाहरी कवच के लिए इस्तेमाल एक्रिलोनीट्राइल ब्यूटाडीन स्टायरीन (एबीएस) और पॉलिकार्बोनेट की कीमतों में लगभग 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पॉलिप्रोपलीन की कीमतों में 45 फीसदी, पीवीसी में 33 फीसदी, फोम में 25 फीसदी और पैकेजिंग सामग्री में करीब 47 फीसदी का इजाफा हुआ है।
उद्योग जगत के अधिकारियों ने इस उछाल का कारण वैश्विक पेट्रोकेमिकल आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, माल ढुलाई की बढ़ी हुई लागत और कई क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों के बीच कच्चे तेल के बाजारों में अस्थिरता को बताया, जिसने विनिर्माण क्षेत्रों में इनपुट की लागत पर असर डाला है।