एचईजी एडवांस्ड मैटेरियल्स डीमर्जर के बाद अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए लगभग 5,500 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की योजना बना रही है। इसमें सिंथेटिक ग्रेफाइट एनोड मैटेरियल्स को वृद्धि के लिए सबसे अहम माना जा रहा है। कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी मांग को पूरा करने पर ध्यान दे रही है। एचईजी की योजना है कि वह वित्त वर्ष 2032 तक एनोड मैटेरियल की क्षमता को शुरुआती 20,000 टन से बढ़ाकर 60,000 टन करे। साथ ही, वह अपने बैटरी एनर्जी सॉल्युशंस और ग्रीन-पावर बिजनेस का भी विस्तार करेगी। योजनाबद्ध निवेश में एनोड बिजनेस का हिस्सा सबसे ज्यादा होगा।
बिज़नेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए कंपनी के चेयरमैन, एमडी और सीईओ ऋजु झुनझुनवाला ने कहा, ‘इस डीमर्जर का मकसद वैल्यू हासिल करना, निवेशकों को हर बिजनेस लाइन तक केंद्रित पहुंच देना और शेयरधारकों के लिए मूल्य बढ़ाना है।’ उन्होंने कहा, ‘इससे अलग हुई कंपनियों को बेहतर फंडिंग स्वायत्तता और एक खास व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करने की सुविधा भी मिलेगी।’ एचईजी लगभग 5,500 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च के लिए लगभग 1,500 करोड़ रुपये
(इक्विटी के जरिये) और 4,000 करोड़ रुपये कर्ज से जुटाने की योजना बना रही है, जो 27:73 का अनुपात होगा। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक स्थिर रिटर्न हासिल करना है। इसमें नियोजित पूंजी पर प्रतिफल लगभग 17 प्रतिशत होगा।
सबसे पहले एनोड बिजनेस को वाणिज्यिक स्तर पर लाने पर ध्यान दिया जाएगा। 20,000 टन क्षमता वाले पहले चरण का काम चल रहा है और वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है। इंजीनियरिंग का काम पूरा हो चुका है और खरीद का 85 फीसदी काम भी हो गया है। साथ ही, बाद में इस संयंत्र की क्षमता को बढ़ाकर 30,000 टन किया जा सकता है। कंपनी पिछले 12 महीनों से मध्य प्रदेश के मंडीदीप में 200 टन का डेमोंस्ट्रेशन प्लांट का भी संचालन कर रही है।