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कर्ज का बोझ कम करने की जुगत में एचडीआईएल भी

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Last Updated- December 10, 2022 | 7:13 PM IST

मुंबई की रियल एस्टेट कंपनी हॉउसिंग डेवलपमेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर (एचडीआईएल) ने 2,200 करोड़ रुपये के कर्ज के भुगतान को आगे के लिए टाल दिया है। कंपनी अब यह कर्ज बैंकों को अगले 3-4 सालों में चुकाएगी।
कंपनी के एक बडे अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नैशनल बैंक और यूको बैंक जैसे सरकारी बैंकों से लिए यह कर्ज लिया था। इसमें से 650 करोड़ रुपये तो कंपनी को इस महीने के आखिर तक चुकाने थे, जबकि 1500 करोड़ रुपये का कर्ज उसे अगले साल मार्च में चुकना था।
कंपनी के ऊपर करीब 4,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी ने 3,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस पैसे का इस्तेमाल खास तौर पर इसकी मुंबई हवाईअड्डा नवीनीकरण के लिए किया जाना था। उस अधिकारी ने बताया कि, ‘ऋण पुनर्संरचना के बाद भी ब्याज की दर पहले के स्तर पर ही बनी हुई है।’
कंपनी के उप मुख्य प्रबंधक (फाइनैंस) हरि पांडे ने  बताया कि, ‘पुनर्संरचना के बाद भी हमारे ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं आया है। हमें ज्यादातर सरकारी बैंकों से ही कर्ज लेते हैं और हमारे ब्याज दर प्राइम लेंडिंग रेट्स से जुड़े हुए होते हैं। 15-20 करोड़ रुपये की प्रति महीने की पुनर्संरचना रकम को छोड़ दें तो अब हम 15 महीने तक कोई मोटा भुगतान नहीं करने वाले हैं।’
उन्होंने बताया कि, ‘कंपनी इस वक्त 13.25 फीसदी की दर से कर्ज उठा रही है। सिर्फ दूसरी तिमाही में महंगाई और नकदी की कमी की वजह से ब्याज दर 15.5 फीसदी के स्तर को छू गई थी।’
रियल एस्टेट सेक्टर में आई तेजी की वजह से पिछले दो सालों में डीएलएफ, यूनिटेक, पार्श्वनाथ, एचडीआईएल और दूसरी रियल एस्टेट कंपनियों ने काफी मोटी रकम बाजार से उठा ली थी। इससे उनके कर्जे आज काफी ऊंचे स्तर पर हैं। ज्यादातर रियल एस्टेट का आज कर्ज और इक्विटी का अनुपात 0.8 से लेकर 1.5 हो चुका है। वैसे, इसका समान्य स्तर 0.5 है।
सीएलएसए के एक विश्लेषक का कहना है कि, ‘आज देश की हरेक रियल एस्टेट कंपनी के लिए कर्जों का बढ़ता स्तर चिंता का सबब है। अगर भुगतान को आगे के लिए टाल भी दें तो इसके आगे तो चुकाना ही पड़ेगा।’ लगभग सभी रियल एस्टेट कंपनियों ने रिजर्व बैंक की उस मदद का इस्तेमाल किया है, जिसके तहत वे अपनी वित्तीय सेहत को ध्यान में रखते हुए कर्जों की पुनर्संरचना कर सकते हैं।
पिछले महीने, देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी, डीएलएफ ने अपने 2,000 करोड़ रुपये के कर्ज की 12-13 फीसदी के ब्याज दर पर पुनर्संरचना की थी। वैसे, इसे इस साल जून तक बैंकों को 4,300 करोड़ रुपये चुकाने थे। कंपनी बाकी की रकम बॉन्ड्स और शेयरों को बेचकर उगाहेगी। कंपनी ने हाल ही में भारतीय जीवन बीमा निगम को 5,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे हैं।
उसकी योजना बॉन्ड्स को बेचकर 5,000 करोड़ रुपये उगाहने की है। यूनिटेक ने भी अपने 1,000 करोड़ रुपये के कर्ज की पुनर्संरचना की है। उसने म्युचुअल फंड कंपनियों से लिए गए कर्जों के भुगतान को भी तीन महीने के लिए टाल दिया है। 

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First Published - March 7, 2009 | 4:33 PM IST

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