वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र के सुनहरे साल देखे हैं और उद्योग को अब अगले 10 साल को ‘भारत का दशक’ बनाने की कवायद करनी चाहिए, जब पूरा विश्व भारत के मानकों का पालन करे।
उन्होंने कहा कि 2021 से 2030 तक पूरी दुनिया भारत के गुणवत्ता मानकों, नियामकीय प्रक्रियाओं और विनिर्माण गतिविधियों द्वारा संचालित होनी चाहिए। उद्योग संगठन फिक्की की ओर से आयोजित इंटरनैशनल कॉन्फ्रेंस आन फार्मास्यूटिकल्स ऐंड मेडिकल में बोलते हुए गोयल ने कहा कि उद्योग को खुद इसे मिशन के रूप में लेना चाहिए जो दवा उद्योग और देश दोनों के लिए दशक को परिभाषित करे। गोयल ने कहा कि विश्व को आज सीयूआरई की जरूरत है, जो शोध और इंटरप्राइज के माध्यम से लागत प्रभावी सार्वभौम सॉल्यूशंस से आएगा।
उन्होंने कहा, ‘अगर हम अपने ऊपर लें कि भारत विश्व का उपचार करने जा रहा है तो मुझे लगता है कि मेडटेक, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल उपकरण और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में विश्व में अग्रणी बनने को लेकर हमारी क्षमता की कोई सीमा नहीं है।’
गोयल ने यह भी कहा कि भारत ने बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े कारोबार संबंदी पहलू (ट्रिप्स) से छूट के लिए डब्ल्यूएचओ में प्रस्ताव भेजा है, जिससे ज्यादा देशों को कोविड-19 टीका मिल सके। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को अन्य देशों से समर्थन मिल रहा है।