सत्यम के रूप में हुए देश में अब तक के सबसे बड़े कॉर्पोरेट फर्जीवाड़े के बाद ऑडिटिंग को लेकर सरकार खासी गंभीर नजर आ रही है।
कंपनी मामलों का मंत्रालय इस पेशे से जुड़े कानूनी प्रावधानों समेत कई और बातों का गहन विश्लेषण कर रहा है।
इसके चलते ‘सरोगेट ऑडिटिंग’ के काम में लगी फर्मों के सामने कुछ मुश्किलें आ सकती हैं। इनमें से ज्यादातर विदेशी फर्म ही हैं जो देश में ऑडिटिंग का काम कर रही हैं। इससे जुड़े एक करीबी सूत्र का कहना है कि इस मामले में जल्द ही कोई अधिसूचना आ सकती है।
देश में चार्टर्ड अकाउंटेंट के पेशे को लेकर 1949 में चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिनियम और 1988 में चार्टर्ड एकाउंटेंट रेग्यूलेशन अधिनियम बनाया गया था। इन्हीं मौजूदा कानूनों के आधार पर ही देश में अब तक इस पेशे का नियमन होता रहा है।
सरोगेट ऑडिट फर्म के मामले में भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खासकर उन ऑडिट फर्म को लेकर जिनको भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट ने स्थापित किया है और उन्होंने किसी विदेशी फर्म के साथ गठजोड़ कर रखा है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे गठजोड़ों पर आपत्ति दर्ज की जा रही है।
एक आपत्ति तो इस बात को लेकर है कि भारतीय कंपनी ऑडिटिंग करने के लिए अनुबंध हासिल करती है और असल में विदेशी कंपनी, किसी भारतीय कंपनी का ऑडिट कर रही होती है। इस तरह से कंपनी अधिनियम, 1956 और अनुबंध अधिनियम, 1872 दोनों का उल्लंघन होता है।
सूत्र का कहना है कि विदेशी फर्मों की भारतीय शाखाएं, इस तरह के गठजोड़ों से फायदा उठा रही हैं। दरअसल, कंपनियां चाहती हैं कि उनका ऑडिट विदेशी फ र्म के जरिये ही हो ताकि विदेशी बाजार में पहचान बढ़ाने का मौका मिल सके।
यह पहचान कंपनी के लिए विदेशी बाजार से धन उगाहने, विलय और अधिग्रहण में बड़ी काम की सबित होती है। इस तरह की बातें बहुत आम हैं, लेकिन इसको रोकने के लिए कोई कानून मौजूद नहीं है। इस बाबत सूत्र का कहना है, ‘हम इस तरह के मामलों का अध्ययन कर रहे हैं और उन कानूनी प्रक्रियाओं का विश्लेषण कर रहे हैं जिनके आधार पर विदेशी फर्म, किसी भारतीय कंपनी का ऑडिट करती है। ‘
इसमें से बहुत कुछ बदल भी जाता, जब सीमित उत्तरदायित्व साझेदारी (एलएलपी) अधिनियम, 2008 लागू हो जाता। इसके तहत विदेशी चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों को देश में अपनी शाखाएं खोलने का रास्ता साफ हो जाता।
बिल वैसे तो 12 दिसंबर 2008 को पारित हो चुका है, लेकिन यह अभी तक कानून का रूप नहीं ले सका है। इसके अलावा प्रत्येक साझीदार फर्म को अधिकतम 30 ऑडिट करने की बाधा की भी समीक्षा की जा रही है। इसमे गुणवत्ता के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। कंपनियों की विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए ऑडिटिंग फर्म को बदलते रहने के बारे में भी विचार किया जा रहा है।