हैदराबाद की प्रमुख दवा कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) कोविड-19 के लिए रूस में तैयार टीका स्पूतनिक वी के लिए भारतीय साझेदार है। कंपनी देश के दूर-दराज के क्षेत्रों तक इस टीके को पहुंचाने के लिए खुद की कोल्ड चेन क्षमताओं के अलावा सरकारी टीकाकरण कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करेगी।
डॉ रेड्डीज ने कहा है कि स्पूतनिक वी का 60 से 70 फीसदी वैश्विक उत्पादन भारत में होगा। स्पूतनिक वी की प्रभावकारिता 91.6 फीसदी है जो भारत में उपलब्ध अन्य सभी कोविड टीकों में सबसे अधिक है। इस टीके के लिए माइनस 18 डिग्री से माइनस 22 डिग्री तापमान को बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
डीआरएल के मुख्य कार्याधिकारी (एपीआई एवं फार्मास्युटिकल सर्विसेज) दीपक सापरा ने कहा कि उन्होंने सिमुलेशन के जरिये भारत में कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे का परीक्षण पहले ही कर लिया है। उन्होंने आज संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘हमने सिमुलेशन परिदृश्य में हैदराबाद से लेकर पूर्व में मणिपुर, उत्तर में लद्दाख और दक्षिण में तमिलनाडु तक कोल्ड चेन का परीक्षण किया है।’
सापरा ने आगे कहा कि स्पूतनिक वी को फ्रोजन अवस्था में इसी तिमाही के दौरान रूस से भारत आयात किया जाएगा। डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि रूस में इसके विनिर्माण स्थल से लेकर कोल्ड चेन पॉइंट और फिर भारत के सभी हिस्सों तक इस टीके की आपूर्ति स्थिर तापमान पर किया जा सके और कोल्ड चेन की पवित्रता बरकरार रहे।
सपरा ने कहा, ‘हमने कॉम्पैक्ट बॉक्स का एक समाधान तैयार किया है जिसके जरिये इस टीके को भारत के विभिन्न हिस्सों में आसानी से हवाई एवं सड़क मार्ग से पहुंचाया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज खुद की कोल्ड चेन क्षमताओं के अलावा राष्ट्रीय टीकाकरण मिशन में इस्तेमाल होने वाले मौजूदा सरकारी कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी उपयोग करेगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास ऑन्कोलॉजी जैसे गंभीर चिकित्सा के लिए कोल्ड चेन हैंडलिंग का अनुभव पहले से ही प्राप्त है। हम उसका फायदा उठाएंगे।’
इस बीच, स्पूतनिक वी वेरिएंट के लिए स्थायित्व डेटा 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच तैयार किया जा रहा है। सापरा ने कहा, ‘इसमें कुछ और महीने लगेंगे। उसके बाद हम दोबारा नियामक से संपर्क करेंगे ताकि इसके लिए भंडारण तापमान की आवश्यकता को संशोधित करते हुए 2 से 8 डिग्री सेल्सियस किया जा सके। उससे इस टीके के भंडारण एवं परिवहन में काफी आसानी होगी।’
फिलहाल डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज ने भारत के लिए 25 करोड़ खुराक के लिए रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ करार किया है। हालांकि भविष्य में खुराक की संख्या बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है।
सपरा ने कहा कि स्पूतनिक वी के वैश्विक उत्पादन का लगभग 60 से 70 फीसदी उत्पादन भारत में होगा। हेटेरो, विरचो,पैनेशिया, ग्लैंड, स्टेलिस, शिल्पा जैसी भारतीय कंपनियां जब तक इसका उत्पादन नहीं बढ़ाएंगी तक तक इस टीके का रूस से आयात किया जाएगा। कुल मिलाकर भारतीय विनिर्माण इकाइयों की सालाना उत्पादन क्षमता 85 करोड़ खुराक की है और इसमें कई नए साझेदार भी जुड़ सकते हैं।