मंदी और बिगड़ते वित्तीय हालात के बीच देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की पॉलिसियों की बिक्री में पिछले कुछ महीनों के दौरान खासी गिरावट दर्ज की गई है।
हालांकि कठिन कारोबारी माहौल होने के बावजूद पिछले दो महीनों में कंपनी का कारोबारी प्रदर्शन सुधरता हुआ लगा है। लेकिन अभी पहले की तरह पटरी पर आने में कंपनी को मशक्कत करनी पड़ेगी।
इस काम के लिए कंपनी की रणनीति और वित्तीय संकट के बीच उसके सामने मौजूदा तथा भावी चुनौतियों पर अनिरूद्ध लस्कर ने कंपनी केअध्यक्ष टी एस विजयन ने बात की। पेश हैं मुख्य अंश :
वैश्विक वित्तीय संकट का जीवन बीमा कारोबार पर कितना असर पडा है? इसके मद्देनजर एलआईसी की रणनीति क्या है?
भारत में जीवन बीमा कंपनियों पर वैश्विक वित्तीय संकट का बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है।
हालांकि बाजार में कारोबार में मंदी और भारी उथल-पुथल के कारण ग्राहकों के विश्वास में जरूर कमी आई है। हमारा ध्यान ऐसी योजनाओं को बाजार में उतारना है जिनकी मांग इस समय बहुत ज्यादा है।
हमारे लिए चिंता की सबसे बडी बात है बाजार की अनिश्चितता का निवेशक के मुनाफे पर होनेवाला असर।
प्रीमियम के नए दौर में एलआईसी की हिस्सेदारी कम हुई है। क्या आप उन कारणों को बताएंगे जिनका असर एलआईसी पर पड़ा है। हिस्सेदारी को फिर से बढाने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
बाजार में नई कंपनियों के कारोबार में उतरने से हिस्सेदारी पर असर पड़ता ही है। इसे नहीं रोका जा सकता। हाल के कुछ महीनों में नई पालिसियों के कारोबार में गिरावट देखने को मिली है।
कारोबार में गिरावट की वजह ग्राहकों की यूलिप योजनाओं में दिलचस्पी कम होना है। साथ ही, बाजार में योजनाओं की कमी होना जिससे ग्राहकों की मौजूदा मांग पूरी नहीं हो पा रही है। हमने अपनी रणनीति की समीक्षा की है जिससे हमारे नए कारोबार में तेजी आई है।
हमने हाल में जीवन आशा योजना की शुरुआत की है। यह योजना दरअसल हमने ऐसे लोगों को ध्यान में रखकर बाजार में पेश की है, जो इसके एवज में रिटर्न की पूरी गारंटी चाहते हैं।
मार्के की बात यह है कि कारोबार के खस्ताहाल होने की वजह से देश में इस समय कोई भी रिटर्न के बारे में किसी भी तरह की गारंटी देने को तैयार नहीं है।
इक्विटी बाजार में कारोबार की खस्ता हालत के कारण यूलिप योजनाओं की बिक्री पर कितना असर पडा है?
इक्विटी बाजार में आए उतार-चढाव केकारण यूलिप योजनाओं की बिक्री पर असर पडा है। इसका असर एलआईसी पर भी पडा है और इस कारण प्रीमियम में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यूलिप की शुरुआत ग्राहकों की इक्विटी बजार में बढ़ती दिलचस्पी को देख कर की गई थी।
हमारे पोर्टफोलियो में अब इसकी अहम भागीदारी हो चुकी है। हालांकि यूलिप की मांग बढ़ाना बीमाकर्ता के हाथों में नहीं हैं क्योंकि यह बाजार पर निर्भर करती है। फिलहाल यूलिप का कारोबार मंदा जरूर पडा है लेकिन अभी यह समाप्त नहीं हुआ है।
आप अपने के्रडिट कार्ड और स्वास्थ्य बीमा कारोबार से अगले साल किस तरह केप्रदर्शन की अपेक्षा रखते हैं?
हम अपने के्रडिट कार्ड के कारोबार को जनवरी 2009 तक शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
शुरुआत में इसे छोटे स्तर पर शुरू करेंगे और पहले पहल हमारे कर्मचारी, एजेंट और पॉलिसीधारक ही हमारे ग्राहक होंगे। इसके बाद जब कारोबार जोर पकड़ता दिखेगा तो फिर उसी आधार पर कारोबार का विस्तार करेंगे।
स्वास्थ्य बीमा कारोबार में हमने पिछले साल ही कदम रखा है। इन पॉलिसियों को बाजार में बेचा जाता है और इन्हें एलआईसी की योजना की तरह जारी किया जाता है।
जब से कारोबार की शुरुआत हुई है, उसके मात्र चार महीनों केभीतर हमने एक लाख पॉलिसियां बेची हैं। आने वाले साल में हम और बेहतर कारोबार करना चाहते हैं और इसके लिए हम ज्यादा से ज्यादा योजनाएं शुरू करेंगे।