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सामान्य बीमा कंपनियां घटाएं खर्च

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Last Updated- December 14, 2022 | 8:44 PM IST

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को अपनी शाखाओं को सुसंगत करने तथा ऐसे खर्चों में कटौती करने को कहा है, जिनसे बचा जा सकता है। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्देश विशेष रूप से नैशनल इंश्योरेंस, ऑरियंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के लिए है, जिससे इन कंपनियों की वित्तीय सेहत सुधारी जा सके।
इससे पहले इसी साल केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों की विलय की प्रक्रिया को रोक दिया था। तीनों कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। सरकार ने इन कंपनियों में 12,450 करोड़ रुपये की पूंजी डालने की मंजूरी दी थी ताकि ये नियामकीय मानकों को पूरा कर सकें।
सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने इन कंपनियों से अपनी शाखाओं को तर्कसंगत करने तथा गेस्ट हाउस जैसे बेवजह के खर्चों में कटौती करने को कहा है। इसके अलावा इन कंपनियों से डिजिटल माध्यम से अपने कारोबार का विस्तार करने को भी कहा गया है। पूंजी डालने की प्रक्रिया के तहत सरकार ने नैशनल इंश्योरेंस कंपनी की अधिकृत शेयर पूंजी को बढ़ाकर 7,500 करोड़ रुपये करने की अनुमति दी है। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और ऑरियंटल इंश्यारेंस कंपनी की अधिकृत पूंजी को 5,000 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी गई है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई में इन कंपनियों में 12,450 करोड़ रुपये  की पूंजी डालने की मंजूरी दी है। इसमें 2019-20 के दौरान इन कंपनियों को उपलब्ध कराई गई 2,500 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है। इस साल सरकार इन कंपनियों में 3,475 करोड़ रुपये की पूंजी डाल चुकी है। शेष 6,475 करोड़ रुपये की राशि एक या अधिक किस्तों में डाली जाएगी। सरकार ने 2020-21 के बजट में इन कंपनियों में 6,950 करोड़ रुपये की पूंजी डालने का प्रावधान किया था।

पहली छमाही में अमेरिका से सबसे ज्यादा एफडीआई
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। अमेरिका ने मॉरीशस को अपदस्थ कर यह स्थान हासिल किया है। इसकी जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों से मिली है।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर के दौरान भारत को अमेरिका से 7.12 अरब डॉलर का और मॉरीशस से दो अरब डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ। मॉरीशस इस दौरान चौथे स्थान पर फिसल गया। साल भर पहले की समान अवधि में मॉरीशस एफडीआई का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत रहा था। अमेरिका तब चौथे स्थान पर था। आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर 8.30 अरब डॉलर एफडीआई के साथ शीर्ष पर बना रहा। इस दौरान केमैन आइलैंड से 2.1 अरब डॉलर का एफडीआई मिला। इस दौरान भारत में नीदरलैंड से 1.5 अरब डॉलर, ब्रिटेन से 1.35 अरब डॉलर, फ्रांस से 1.13 अरब डॉलर, जापान से 65.3 करोड़ डॉलर, जर्मनी से 20.2 करोड़ डॉलर और साइप्रस से 4.8 करोड़ डॉलर का एफडीआई आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका से बढ़ते एफडीआई से दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंध का पता चलता है। भाषा

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First Published - November 30, 2020 | 12:25 AM IST

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